Khunti: तोरपा प्रखंड के जरिया पंचायत अंतर्गत गौड़बेडा गांव में 19वीं सदी के प्रमुख जननायक एवं धरती आबा बिरसा मुंडा के आध्यात्मिक गुरु आनंद स्वांसी पांड की प्रतिमा का भव्य अनावरण सह 190वीं जयंती समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और बिरसईत अनुयायियों की उपस्थिति रही, जिससे पूरा गांव भक्ति और ऐतिहासिक गौरव के माहौल में डूबा नजर आया। 
जनप्रतिनिधियों ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष, बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा, सांसद प्रतिनिधि हेलेन होरो, मुखिया बिमला ढ़ोडराय, ग्राम प्रधान सिबराम मुंडा, लोहरा पाहन, छोटराय पाहन तथा समिति अध्यक्ष मंगल सिंह स्वांसी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
समारोह के दौरान बिरसईत अनुयायियों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गुरु आनंद स्वांसी पांड को नमन किया। आयोजन स्थल पर “गुरु आनंद स्वांसी पांड अमर रहें” और “जोहार झारखंड” के नारों से वातावरण गूंज उठा।
1891 में मिला था मार्गदर्शन
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1891 में बिरसा मुंडा गुरु आनंद स्वांसी पांड के संपर्क में आए थे। लगभग तीन वर्षों तक उन्होंने उनसे आध्यात्मिक, राजनीतिक, अस्त्र-शस्त्र संचालन और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का ज्ञान प्राप्त किया। गुरु आनंद स्वांसी पांड महाभारत और रामायण के गहन ज्ञाता थे तथा तीर-धनुष संचालन में भी दक्ष थे। उनके मार्गदर्शन ने बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा दी, जिसने आगे चलकर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गौड़बेडा को बनाया जाएगा आदर्श ग्राम
जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि ऐतिहासिक गौड़बेडा गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने समाज से अपने महापुरुषों और गुरुओं के योगदान को सहेजने और इतिहास को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा ने कहा कि किसी भी महापुरुष की सफलता के पीछे उनके गुरु का महत्वपूर्ण योगदान होता है। गुरु का स्थान भगवान के समान है और आनंद स्वांसी पांड ने बिरसा मुंडा के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।
जन्म और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बताया गया कि गुरु आनंद स्वांसी पांड का जन्म 16 फरवरी 1835 को वर्तमान खूंटी जिला अंतर्गत तोरपा प्रखंड के जरिया पंचायत स्थित गौड़बेडा गांव में हुआ था। उनका निधन 20 जुलाई 1905 को हुआ। उनकी 190वीं जयंती के अवसर पर पहली बार प्रतिमा अनावरण सह जयंती समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन स्वांसी (पांड) तांती समाज एकता संघ एवं झारखंड प्रतिमा निर्माण संघ कार्यक्रम संयोजक समिति के तत्वावधान में किया गया। समिति अध्यक्ष मंगल सिंह स्वांसी सहित अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह में रामचंद्र स्वांसी, सहदेव स्वांसी, अक्षय स्वांसी, मंडला स्वांसी, अर्जुन स्वांसी, काली स्वांसी, राहुल स्वांसी, विशाल स्वांसी, मदन स्वांसी, हरिकृष्ण स्वांसी, नारायण स्वांसी, दुर्गा स्वामी, जयंती स्वांसी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।



