Khunti: प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के विरोध में आज भोंडा गांव में संयुक्त ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सभा में आसपास के लगभग आठ से नौ गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों और ग्रामीणों ने अपने-अपने विचार रखे। विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित सड़क बेड़ों से कर्रा-खूंटी होते हुए जमशेदपुर तक जाएगी। इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जिन लोगों की जमीन सड़क निर्माण में जा रही है, उन्हें नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इससे प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।

ग्राम सभा को संबोधित करते हुए भोंडा के ग्राम प्रधान बेटन पाहन ने कहा कि पहले से जो सड़क बनी हुई है, उसी का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कर लिया जाए। जहां आवश्यकता हो, वहां सीधा कर निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़े तो सीमित अधिग्रहण किया जाए, इससे ग्रामीणों को आपत्ति नहीं है। लेकिन वे अपनी उपजाऊ खेती योग्य जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।

उन्होंने कहा, “हमारा जमीन ही हमारा जीवन है। अगर जमीन नहीं रहेगा तो हम अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे? हमारे पास कोई अन्य रोजगार का साधन नहीं है। जमीन ही हमारी आय और जीविका का एकमात्र स्रोत है। भूमि अधिग्रहण से कई लोग भूमिहीन हो जाएंगे और कई बेघर भी हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मुआवजे के तौर पर राशि तो दे रही है, लेकिन वह राशि कितने दिनों तक चलेगी, जबकि जमीन जीवनभर साथ देती है।
वहीं भोंडा गांव के लखन प्रधान ने बताया कि ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा को लिखित आवेदन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। आवेदन में मांग की गई है कि नई सड़क बनाने के बजाय पहले से बनी सड़क का चौड़ीकरण या वैकल्पिक तकनीकी उपाय अपनाया जाए, ताकि किसानों की जमीन सुरक्षित रह सके। 
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। इस संबंध में जल्द ही खूंटी उपायुक्त को भी लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की जाएगी। यदि जिला स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी मांग रखेंगे। उन्होंने दो टूक कहा, “किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। यह हमारे पूर्वजों की दी हुई संपत्ति है, इसे बचाने के लिए हम अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।”
ग्राम सभा में लखन प्रधान, दानियाल मुंडा, जागरण मुंडा, डेमना गोप जुर्दाग, धनपत प्रधान (कटहलटोली भोंडा), विकास कुमार महतो (बिचगड़ा), चाइना उरांव (अमजोरा), बहादुर भेंगरा (भुआटोली) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



