Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत अब यह राष्ट्रगान ‘जन-गण मन’ से पहले गाया जाएगा। नई गाइडलाइंस के अनुसार इसे विशेष सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। प्रमुख सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान के छह अंतरे 3 मिनट 10 सेकंड के भीतर गाने या बजाने होंगे, जबकि वर्तमान में राष्ट्रगान केवल 52 सेकंड का है।
सियासत में मुद्दा
केंद्र के इस फैसले पर राजनीति भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इसे भाजपा की वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्र का सम्मान, स्वाभिमान और गौरव का प्रतीक है, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। वहीं, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का राजनीतिकरण करना देश के लिए बड़ा दुर्भाग्य है।
कब-कब गाना अनिवार्य होगा
केंद्र की अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय गीत अब निम्न अवसरों पर अनिवार्य होगा:
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सिविल सम्मान समारोह, जैसे पद्म पुरस्कार।
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सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति, राज्यपाल या उपराज्यपाल के आने और जाने पर।
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आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में।
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किसी परेड या राष्ट्रीय झंडे के आयोजन में।
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सरकार द्वारा जारी किए गए विशेष आदेश पर।
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औपचारिक न होने के बावजूद मंत्रियों की उपस्थिति वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में।
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स्कूलों में रोज सुबह राष्ट्रीय गीत बजाने की व्यवस्था।
केंद्र की इस पहल से स्पष्ट हो गया है कि अब वंदे मातरम सिर्फ औपचारिक अवसरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी प्रमुख सरकारी, शैक्षणिक और विशेष कार्यक्रमों में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।



