Ranchi: नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इस बार चुनावी तस्वीर में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा चर्चा में है। शहर की सरकार बनाने में महिलाएं अब सिर्फ आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामान्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में दावेदारी ठोक रही हैं। नामांकन के अंतिम दिन तक जिस तरह से महिला प्रत्याशियों की मौजूदगी देखने को मिली, उसने यह साफ कर दिया है कि अब महिलाएं राजनीति में पुरुषों पर निर्भर रहने के बजाय खुद नेतृत्व करने को तैयार हैं।
आंकड़ों में दिखी महिलाओं की मजबूत मौजूदगी
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक महापौर और अध्यक्ष पद के लिए कुल 674 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया, जिनमें 283 महिलाएं शामिल हैं। वहीं वार्ड पार्षद पद के लिए दाखिल 6305 नामांकनों में से 3179 महिला उम्मीदवार हैं। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
रांची महापौर चुनाव में 19 उम्मीदवार मैदान में
रांची महापौर पद के लिए कुल 19 अभ्यर्थियों ने नामांकन किया है। इनमें रमा खलखो, कथरीना तिर्की, सुजाता कच्छप, किरण कुमारी, रौशनी खलखो सहित कई महिला उम्मीदवार शामिल हैं, जबकि पुरुष उम्मीदवारों में सुनील फकीरा कच्छप, देवी दयाल मुंडा, संजय कुमार टोप्पो, अजीत लकड़ा और अन्य नाम शामिल हैं। इस मुकाबले में महिला उम्मीदवारों की सक्रियता ने चुनाव को और रोचक बना दिया है।

सामान्य सीटों पर भी महिलाएं आगे
महिला प्रत्याशियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। रांची के वार्ड नंबर 8 (सामान्य सीट) से चुनाव लड़ रहीं किरण खलखो का कहना है कि विकास की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना सबसे सकारात्मक बदलाव है। उनके मुताबिक, अवसर मिलते ही महिलाएं आगे आकर जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं, चाहे सीट आरक्षित हो या अनारक्षित।
जनसेवा और बदलाव के इरादे से उतरीं महिलाएं
वार्ड नंबर 25 से चुनाव लड़ रहीं गुड्डी कुमारी कहती हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं, जरूरत सिर्फ मौके की है। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहीं दीक्षा सिंह का कहना है कि वे जनता की समस्याओं के समाधान और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरी हैं। उनके अनुसार, राजनीति में महिला या पुरुष का फर्क नहीं होना चाहिए, बल्कि निष्ठा और ईमानदारी से काम करना ही असली मुद्दा है।
अहम होगी महिलाओं की भूमिका
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब स्क्रूटनी और नाम वापसी की औपचारिकताएं होंगी, जिसके बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची सामने आएगी। लेकिन इतना तय है कि इस बार नगर निकाय चुनाव में महिलाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाने वाली है। जिस आत्मविश्वास और सक्रियता के साथ महिलाएं शहर की सरकार बनाने के लिए आगे आई हैं, वह स्थानीय राजनीति में एक नए बदलाव का संकेत है।


