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संयुक्त ग्राम सभा का वार्षिक सम्मेलन संपन्न, पेशा नियमावली व जल-जंगल-जमीन संरक्षण पर हुआ मंथन

Khunti: खूंटी जिला अंतर्गत तोड़ांकेल बागीचा में आज संयुक्त ग्राम सभा का वार्षिक सम्मेलन पारंपरिक गरिमा एवं व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता डेमका मुंडा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डेमका मुंडा ने ग्राम सभा के वर्षभर के आय-व्यय का लेखा-जोखा तथा नैतिक मूल्यों की स्थापना, समाज की एकता और मजबूती, पेशा नियमावली में मौजूद कमियों एवं त्रुटियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं को बैठक में रखा।

सम्मेलन की शुरुआत अमर वीर शहीदों — भगवान बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा, रामदयाल मुंडा, सोमा मुंडा सहित अन्य वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात आदिवासी रीतिरिवाजों के अनुसार पूजा-पाठ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी एवं एक्टिविस्ट वॉल्टर कंडुलना,आदिवासी समन्वय समिति के खूंटी जिला अध्यक्ष चंद्र प्रभात मुंडा, दुर्गावती ओडया, मथुरा कंडीर, दामु मुंडा, बिनसाय मुंडा एवं तड़कन मुंडा मंचासीन रहे। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

वॉल्टर कंडुलना ने सभा को संबोधित करते हुए पेशा नियमावली और केंद्रीय कानूनों के बीच मौजूद विसंगतियों, खामियों एवं त्रुटियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन कमियों के कारण ग्राम सभा के अधिकारों का समुचित क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने केंद्रीय कानूनों को अक्षरशः लागू कराने के लिए ज्यूरी मॉडल को अपनाने का प्रस्ताव भी रखा।

वहीं आदिवासी समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष चंद्र प्रभात मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की मजबूती तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सीएनटी एक्ट के अनुरूप और पेशा नियमावली के तहत लोकतांत्रिक तरीके से ग्राम सभा का गठन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची और सीएनटी एक्ट आदिवासियों के लिए सुरक्षा कवच हैं और इस क्षेत्र की एक इंच जमीन पर भी सरकार का अधिकार नहीं बनता। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला स्तर पर ऐसे पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाती है जिन्हें क्षेत्र के कानून, परंपरा और संवैधानिक प्रावधानों की समुचित जानकारी नहीं होती, जिसके कारण आदिवासियों की जमीन गलत तरीके से गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित हो रही है।

चंद्र प्रभात मुंडा ने आगे कहा कि इसी भूमि विवाद के परिणामस्वरूप पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या हुई, लेकिन अब तक इस हत्याकांड के असली सौदागरों और साजिशकर्ताओं को सामने नहीं लाया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज की यह मांग है कि सोमा मुंडा हत्याकांड के वास्तविक दोषियों को जनता के सामने लाया जाए, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।

दामु मुंडा ने अपने वक्तव्य में कहा कि नागवंशी राजा दुर्जन साहे द्वारा छोटा नागपुर क्षेत्र में जमींदारों और बाहरी लोगों को बसाने की प्रक्रिया से आदिवासियों के दमन और शोषण की शुरुआत हुई, जो आज भी विभिन्न रूपों में जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीएनटी एक्ट के अनुसार पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में जमीन के ऊपर और जमीन के नीचे केवल आदिवासियों का ही अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर छीने जाने नहीं दिया जाएगा।

दुर्गावती ओडया ने कहा कि छोटा नागपुर क्षेत्र रूढ़ीवादी आदिवासी परंपराओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है और इसे आदिवासियों ने ही बसाया है, जिसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रमाण आज भी मौजूद हैं।

बिनसाय मुंडा ने भी जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को आदिवासी अस्तित्व से जोड़ते हुए इन संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

सम्मेलन के अंत में समाज की एकता, अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।

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