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बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर बहु-हितधारक परामर्श कार्यक्रम का आयोजन

Khunti: माननीय झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देशन तथा रसीकेश कुमार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, खूंटी के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), खूंटी द्वारा आज “बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करना – पोक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के मध्य समन्वय” विषय पर एक दिवसीय बहु-हितधारक परामर्श सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य समूह खूंटी जिला के अनुसंधान पदाधिकारी (Investigating Officers) रहे। जिले के सभी थाना क्षेत्रों से अनुसंधान पदाधिकारियों ने इसमें भाग लिया। साथ ही पैरा लीगल वालंटियर्स (पीएलवी), सपोर्ट पर्सन, जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू), सामाजिक कल्याण विभाग के प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित हितधारकों की भी सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी, अभियोजन पक्ष, डीसीपीयू तथा चिकित्सा विभाग के अधिकारी प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सचिव, डीएलएसए, खूंटी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

पोक्सो अधिनियम पर विशेष न्यायाधीश का मार्गदर्शन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राकेश कुमार मिश्रा, विशेष न्यायाधीश (पोक्सो), खूंटी ने पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर विस्तृत एवं सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कानून के विभिन्न प्रावधानों, पीड़ित एवं अभियुक्त की आयु निर्धारण की प्रक्रिया, पोक्सो अधिनियम के लैंगिक-तटस्थ (Gender Neutral) स्वरूप तथा अनुसंधान पदाधिकारी द्वारा पीड़ित का बयान यथाशीघ्र दर्ज किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पोक्सो मामलों का विचारण एक वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाना चाहिए तथा पीड़ित की पहचान का प्रकटीकरण दंडनीय अपराध है। साथ ही पोक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम में निहित पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों को भी विस्तार से समझाया।

प्रभावी अनुसंधान पर अभियोजन पक्ष का वक्तव्य

इसके पश्चात वेद प्रकाश, लोक अभियोजक, खूंटी ने पोक्सो एवं किशोर न्याय मामलों में उचित एवं प्रभावी अनुसंधान से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान में पाई जाने वाली कमियों (लैकुना) की चर्चा करते हुए समयबद्ध, संवेदनशील एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

किशोर न्याय ढांचे पर चर्चा

विद्यावती कुमारी, प्रधान दंडाधिकारी, किशोर न्याय बोर्ड ने किशोर न्याय ढांचे की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कानून से संघर्षरत बालक (चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ) तथा देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक (चाइल्ड इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन) की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हुए संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्एकीकरण पर जोर

समीमुद्दीन अंसारी, संरक्षण पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई ने बच्चों के पुनर्वास, पुनर्स्थापन एवं सामाजिक पुनर्एकीकरण पर अपने विचार रखे। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास हेतु उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं, शिक्षा एवं विद्यालयों में नामांकन तथा बाल देखभाल संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में डीसीपीयू द्वारा सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक कल्याण विभाग के सहयोग से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

चिकित्सा एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष बल

नागेश्वर मांझी, सिविल सर्जन, खूंटी ने पीड़ित एवं अभियुक्त के समय पर चिकित्सकीय परीक्षण एवं उपचार, बेहतर मानसिक उपचार हेतु रिनपास एवं सीआईपी में समय पर रेफरल, सदर अस्पताल, खूंटी में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सदर अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में औषधियों की उपलब्धता तथा पीड़ितों के लिए मनोवैज्ञानिक देखभाल एवं काउंसलिंग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन अमरदीप, सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता द्वारा किया गया। अंत में नम्रता कुमारी, उप प्रमुख, विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता प्रणाली, खूंटी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का समापन सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय, संवेदनशीलता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के संकल्प के साथ किया गया, ताकि पोक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत बच्चों के सर्वोत्तम हित, संरक्षण एवं पुनर्वास को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

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