Palamu : पलामू जिले में बाल विवाह और डायन प्रथा के खिलाफ एक बड़े जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। शनिवार को मेदिनीनगर स्थित शिवाजी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त समीरा एस के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने इन सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ शपथ ली।
एनएफएचएस आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
कार्यक्रम के दौरान सामने आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार पलामू जिले में करीब 35 प्रतिशत शादियां अब भी बाल विवाह के दायरे में आती हैं। इसे गंभीर चुनौती बताते हुए जिला प्रशासन ने पलामू को बाल विवाह और डायन प्रथा से मुक्त करने के लिए एक ठोस एक्शन प्लान पर चर्चा की।
फ्रंटलाइन वर्करों को किया जा रहा है जागरूक
उपायुक्त समीरा एस ने बताया कि बाल विवाह और डायन प्रथा की रोकथाम को लेकर विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं में आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और अन्य फ्रंटलाइन वर्करों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे समाज में जाकर लोगों को कैसे जागरूक करें और कुप्रथाओं के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाएं।
सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की नई पहल
डीसी ने बताया कि सामाजिक कल्याण विभाग की ओर से एक नई पहल शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य डायन प्रथा और बाल विवाह का उन्मूलन करना है। जिले के हुसैनाबाद और छतरपुर क्षेत्रों में ऐसी कार्यशालाएं पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और अब पूरे जिले में इसे विस्तार दिया जा रहा है।
हस्ताक्षर अभियान और शिकायत के लिए हेल्पलाइन
जागरूकता कार्यशाला के दौरान डीसी समेत अन्य अधिकारियों ने हस्ताक्षर अभियान की भी शुरुआत की। इस दौरान बताया गया कि जिले में करीब 30 प्रतिशत लड़कियां अब भी स्कूल नहीं जा रही हैं, जो बाल विवाह की बड़ी वजह बन रही है। डीसी ने लोगों को जानकारी दी कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो 1098, 181 या 112 पर तुरंत शिकायत की जा सकती है, ताकि समय रहते बाल विवाह को रोका जा सके।
इस अभियान के जरिए जिला प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि पलामू में बाल विवाह और डायन प्रथा के खिलाफ अब समाज और प्रशासन मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।


