Ranchi: इस वर्ष दावोस में आयोजित होने वाला विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) झारखंड के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। पहली बार झारखंड को इस वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से अपनी बात रखने का अवसर मिल रहा है। राज्य सरकार की ओर से पूरी तैयारी की जा रही है, ताकि झारखंड अपनी औद्योगिक क्षमता और “इनफिनाइट ऑपर्च्युनिटी स्टेट” के रूप में पहचान को दुनिया के सामने मजबूती से प्रस्तुत कर सके।
इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाएगा कि जब आधी आबादी यानी महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो अर्थव्यवस्थाएं अधिक मजबूत होती हैं और विकास टिकाऊ बनता है। इसी विचार को झारखंड की बेटी और झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष सह विधायक कल्पना सोरेन वैश्विक मंच से प्रस्तुत करेंगी।
महिला नेतृत्व और समावेशी विकास पर देंगी व्याख्यान
कल्पना सोरेन दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक और यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान महिला नेतृत्व, लैंगिक समानता और समावेशी विकास से जुड़े कई उच्चस्तरीय मंचों पर झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी। वे आदिवासी, ग्रामीण और आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाली महिलाओं की वास्तविकताओं और आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर साझा करेंगी और बताएंगी कि कैसे ये महिलाएं आज झारखंड के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की वाहक बन रही हैं।
महिला सशक्तिकरण पर झारखंड का मॉडल होगा प्रस्तुत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों को कल्पना सोरेन दावोस में विस्तार से रखेंगी। वे महिला सशक्तिकरण से जुड़े ब्रिक्स पैनल, ईटी महिला सशक्तिकरण संवाद, एलायंस फॉर ग्लोबल गुड के ‘वी लीड’ मंच और भारत पवेलियन के आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
इन मंचों से वे यह स्पष्ट करेंगी कि झारखंड में महिला विकास केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, नीति निर्माण और संस्थागत शक्ति पर आधारित है।
35 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, कल्पना सोरेन अपने संबोधन में झारखंड में महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी देंगी। राज्य आजीविका संवर्धन समिति के माध्यम से झारखंड में 35 लाख से अधिक महिलाएं 2 लाख 80 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।
पिछले कुछ वर्षों में इन महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 5000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत किया गया है। ये महिलाएं अब किसान, उद्यमी, बैंकर, कारीगर और आजीविका सृजनकर्ता के रूप में आत्मनिर्भर बन रही हैं।
पलाश ब्रांड और मंईयां सम्मान योजना की होगी चर्चा
लखपति दीदी, पलाश, जोहार, झिमडी आदिवा और आजीविका कैफे जैसे कार्यक्रमों ने हजारों महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित करने में सक्षम बनाया है। पलाश ब्रांड के उत्पाद अब न केवल घरेलू बल्कि वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं और 2026 तक इसके तहत 45 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
इसके साथ ही मंईयां सम्मान योजना के तहत हर वर्ष महिलाओं को मिलने वाली लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की सम्मान राशि को भी महिला सशक्तिकरण की बड़ी पहल के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
यूके में शिक्षा और कौशल विकास पर भी होंगी बैठकें
दावोस सम्मेलन के बाद कल्पना सोरेन यूनाइटेड किंगडम में शिक्षा, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े राउंड टेबल संवादों में हिस्सा लेंगी। इस दौरान वे यूके सरकार के अधिकारियों और प्रवासी भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ वे मरांग गोमके स्कॉलरशिप के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे झारखंड के युवाओं से भी संवाद करेंगी। यह दौरा भारत-यूके के बीच समावेशी विकास, महिला नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण को और मजबूती देगा।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन फिलहाल निजी यात्रा पर दिल्ली में हैं। इसके बाद 17 जनवरी को वे अधिकारियों के साथ दावोस के लिए रवाना होंगी।



