Hazaribagh : झारखंड सरकार की नई शराब नीति ने हजारीबाग जिले में शराब कारोबारियों पर भारी आर्थिक दबाव डाल दिया है। नीति लागू होने के बाद लगभग 40 प्रतिशत शराब दुकानें लगातार घाटे में चल रही हैं और बंद होने की कगार पर हैं। इसका असर न केवल कारोबारियों की आजीविका पर पड़ा है, बल्कि राज्य के राजस्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
जिले में फिलहाल 67 शराब दुकानें संचालित हैं, जिन्हें नई नीति के तहत सरकारी नियंत्रण से हटाकर निजी हाथों में सौंपा गया है। निजीकरण के साथ ही लाइसेंस शुल्क, टैक्स और निर्धारित राजस्व लक्ष्य में लगभग 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई।
कारोबारियों की दिक्कतें
दुकानदारों का कहना है कि बाजार में बिक्री पहले जैसी नहीं रही, जबकि टैक्स और देनदारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। झंडा चौक और बस स्टैंड जैसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में भी कई दुकानें घाटे में जा रही हैं। कम बिक्री, ऊंचा लाइसेंस शुल्क, जीएसटी, अतिरिक्त टैक्स और तय राजस्व लक्ष्य ने कारोबार को घाटे का सौदा बना दिया है।
कारोबारी यह भी बता रहे हैं कि हर माह तय लक्ष्य पूरा न होने पर जुर्माने और दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, खराब और कम ग्राहक वाली लोकेशन की दुकानों को भी निजी हाथों में सौंप दिया गया है, जहां बिक्री स्वाभाविक रूप से सीमित रहती है। बावजूद इसके सभी दुकानों पर एक समान टैक्स और राजस्व लक्ष्य लागू किया गया, जो व्यावहारिक नहीं है।
कारोबारी मांगें
दुकानदार और उनके संगठन सरकार से नई शराब नीति की समीक्षा, टैक्स दरों में राहत और राजस्व लक्ष्य में यथार्थपरक संशोधन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मौजूदा हालात जारी रहे, तो आने वाले दिनों में और भी दुकानों के बंद होने की संभावना है।
स्थिति यह है कि अगर नीति में तत्काल बदलाव नहीं किया गया, तो न केवल सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी, बल्कि राज्य सरकार का राजस्व भी गंभीर रूप से प्रभावित होगा। अब यह देखना बाकी है कि सरकार इस बढ़ते संकट पर क्या ठोस कदम उठाती है।



