Ranchi : पेसा (पंचायतों का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार अधिनियम) को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए पेसा से जुड़े निर्णयों का मूल स्वरूप सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने पेसा की मूल भावना के अनुरूप निर्णय लिए हैं तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं करने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
निर्णय सार्वजनिक न होने से बढ़ रहा भ्रम
अर्जुन मुंडा ने कहा कि हर कोई यह जानना चाहता है कि पेसा को लेकर मंत्रिपरिषद ने क्या विचार किया है और किन बिंदुओं पर निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता के अभाव में जनजातीय समाज और आम जनता के बीच संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
भाजपा शासन में हुए पंचायत चुनावों का किया जिक्र
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान अर्जुन मुंडा ने कहा कि राज्य में 32 साल बाद भाजपा शासनकाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे, जिससे स्थानीय स्तर पर जनजातीय समाज को सशक्त करने का काम हुआ। उन्होंने कहा कि यदि पेसा के नियम उसी मूल भावना के आधार पर बनाए गए हैं तो इससे स्थानीय स्वशासन और मजबूत होगा।
लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा एक्ट और पंचायती राज एक्ट भाजपा के शासनकाल में बने थे। 32 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पंचायत चुनाव होने से लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में जरूरी है कि मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत कोई भी नियम पेसा के प्रावधानों और उसकी भावना के खिलाफ न हो।
कानून का शासन जरूरी
अर्जुन मुंडा ने जोर देते हुए कहा कि लोगों को न्याय संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित सिस्टम के तहत मिलना चाहिए। न्याय देने की प्रक्रिया और साधन दोनों सही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कानून का शासन सबसे महत्वपूर्ण है।
पेसा की आत्मा या केवल औपचारिकता?
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की धारा 244 के तहत जनजातीय प्रशासनिक क्षेत्रों के लिए जो व्यवस्था तय की गई है, उसके अनुरूप पेसा का क्रियान्वयन बेहद अहम है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए पेसा को लागू किया है या फिर सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए उस पर एक चादर ओढ़ा दी गई है।



