Dhanbad : धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से बंद पड़ी कोयला खदान से हो रहे जहरीली गैस के रिसाव ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी है। कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी दमघोंटू गैस के प्रभाव से दो महिलाओं की मौत और लगभग 20 लोगों के बीमार पड़ने के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। प्रशासन और बीसीसीएल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 25 हजार से अधिक की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
गैस का असर बढ़ा, 5 कॉलोनियां संकट में
केंदुआडीह की राजपूत बस्ती, मस्जिद मोहल्ला, नया धौड़ा, ऑफिसर कॉलोनी और पांच नंबर बस्ती गैस रिसाव से सबसे अधिक प्रभावित हैं। मुख्य सड़क तक जहरीली गैस की तेज गंध पहुंच रही है। स्थानीय लोग मास्क पहनकर घरों से बाहर निकल रहे हैं, दुकानें बंद हैं और जमीन कई जगहों पर अब भी गर्म है। इलाके में भू-धंसान का खतरा भी बरकरार है।
राजपूत बस्ती “बेहद खतरनाक” घोषित
कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा ने निरीक्षण के बाद राजपूत बस्ती को “बेहद खतरनाक” घोषित किया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की है, जबकि मुआवजा और रोजगार से जुड़ी प्रक्रिया जारी है। बीसीसीएल का कहना है कि बंद खदान में गैस कई वर्षों से दबकर जमा थी, जो अब सतह पर आ गई है।
पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू, लेकिन लोग विरोध में
शनिवार को प्रशासन ने 100 लोगों को बसों के माध्यम से करमाटांड़ और बेलगड़िया पुनर्वास टाउनशिप भेजने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने बसों को रोक दिया। पुटकी अंचलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई और प्रभावित परिवारों को भेजा गया।
बीसीसीएल ने केंदुआडीह मध्य विद्यालय और दुर्गा मंदिर मैदान में 200-200 लोगों की क्षमता वाले अस्थायी राहत शिविर तैयार किए हैं। कुछ परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट किया जा रहा है।
दो महिलाओं की मौत से हड़कंप
गैस रिसाव के कारण प्रियंका देवी और ललिता देवी की मौत हो गई थी। इसके अलावा लगभग 20 लोग आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और चक्कर आने जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंचे थे। विशेषज्ञ इसे कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसों का मिश्रित प्रभाव बता रहे हैं।
पुराना अग्नि व धंसान क्षेत्र, लेकिन पुनर्वास अधूरा
यह क्षेत्र वर्षों से अग्नि प्रभावित और धंसान जोन घोषित है। 2010-11 में बीसीसीएल ने 302 घरों को चिन्हित कर पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन रोजगार संबंधी व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों ने घर छोड़ने से इनकार कर दिया था और शिफ्टिंग रुक गई थी।
अब पांच दिनों से जारी गैस रिसाव ने स्थिति को पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक बना दिया है।
क्षेत्र में भय का माहौल, प्रशासन हाई अलर्ट पर
रिसाव जारी रहने और लगातार बढ़ रहे खतरे को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है। अधिकारियों का कहना है कि स्थायी समाधान तभी संभव है जब पूरा इलाका खाली कराया जाए।
धनबाद का यह संकट अब बड़े मानवीय और पर्यावरणीय खतरे का रूप ले चुका है, और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।



