Barwadih (Latehar) : मंगलवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक, जैक ने विभिन्न वर्गों के परीक्षार्थियों के लिए शुल्क में औसतन 25% तक की बढ़ोतरी की है। हर वर्ष राज्यभर में लगभग 7.50 लाख विद्यार्थी मैट्रिक एवं इंटर परीक्षाओं में शामिल होते हैं। नई शुल्क सूची के अनुसार मैट्रिक की छात्राओं को अब 980 से बढ़ाकर 1680 रुपये तक भुगतान करना होगा।
इंटर परीक्षा शुल्क में भी बड़ी बढ़ोतरी, इंटर के परीक्षार्थियों के लिए भी फीस में भारी बढ़ोतरी की गई है।, छात्राओं के लिए शुल्क 1100 से 1900 रुपये, छात्रों के लिए 1400 से 1900 रुपये तय किया गया है।
सामान्य एवं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों के लिए यह राशि 1180 से बढ़कर 1680 रुपये तक कर दी गई है। स्वतंत्र (Private) परीक्षार्थियों की श्रेणी में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लिए शुल्क एक समान रखा गया है। शिक्षा विभाग ने इस बदलाव को वार्षिक बजट में बढ़ोतरी का हिस्सा बताया है, लेकिन इसका सीधा बोझ लाखों अभिभावकों पर पड़ेगा।
एक साथ इतनी बड़ी वृद्धि पहली बार हाल के वर्षों में परीक्षा शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि एक साथ नहीं की गई थी। इस फैसले से राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है और विपक्ष इसे गरीब एवं ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक हमला बता रहा है।
भाजपा नेता और सांसद प्रतिनिधि कन्हाई सिंह ने राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि महंगाई से त्रस्त परिवारों पर सरकार ने नया बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा, “जब गरीब परिवार मुश्किल से बच्चों की पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं, तब परीक्षा शुल्क में भारी बढ़ोतरी बिल्कुल असंवेदनशील निर्णय है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अचानक बढ़े शुल्क के कारण कई छात्र-छात्राएं परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो सकते हैं। भाजपा ने शुल्क वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पहले से संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में परीक्षा शुल्क बढ़ाना बिल्कुल अनुचित है।
उन्होंने कहा, “शिक्षा को आसान बनाना सरकार की जिम्मेदारी है, कठिन बनाना नहीं। यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो लाखों बच्चों के भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा।”
अभिभावकों का कहना है कि पहले ही स्कूल खर्च, कोचिंग और किताबों के बोझ से परिवार परेशान हैं, ऐसे में परीक्षा शुल्क में अचानक की गई बढ़ोतरी ने उन्हें और संकट में डाल दिया है। जैक के इस निर्णय को लेकर पूरे राज्य में विरोध बढ़ रहा है और लोग सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि वह जल्द ही इस फीस वृद्धि को वापस लेगी।



