Ranchi : राज्य में नगर निगम और नगर निकाय चुनाव चार साल से लंबित हैं। इस मामले में दायर अवमानना याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से नाराजगी जताते हुए कहा कि आगामी 24 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में चुनाव की संभावित तारीख बताई जाए। अदालत ने साफ कहा कि सरकार और आयोग, दोनों चुनाव प्रक्रिया में अब कोई देरी न करें।
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि नगर निकाय चुनाव के लिए कराए गए ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि सीटों के आरक्षण और जनसंख्या सूची से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी आयोग ने मांगी है, जिसे जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। जानकारी पूरी मिलते ही चुनाव अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार की ओर से अभी तक आरक्षण से संबंधित अंतिम अनुशंसा नहीं भेजी गई है। आयोग ने कहा कि जैसे ही अनुशंसा प्राप्त होगी, चुनाव की तैयारी शुरू की जाएगी, जिसमें लगभग तीन माह का समय लगेगा। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अब किसी भी तरह की प्रशासनिक देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार को तीन सप्ताह में अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया था। लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने पर प्रार्थियों — रौशनी खलखो और रीना कुमारी — ने अवमानना का मुद्दा उठाया। अदालत ने कहा कि चुनाव समय सीमा के भीतर कराना अनिवार्य है और इस पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य में जून 2020 से 12 शहरी निकायों में चुनाव नहीं हुए हैं। कई नगर निगम बिना जनप्रतिनिधियों के ही संचालित हो रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 24 नवंबर को आयोग को चुनाव की संभावित तिथि हर हाल में प्रस्तुत करनी होगी, ताकि नगर निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल की जा सके।



