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झारखंड में कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, गुरु नानक जयंती पर तैयारियां पूरी

Dhanbad : झारखंड के विभिन्न जिलों में कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने नदियों और घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। धनबाद, साहिबगंज और दुमका सहित कई जगहों पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। निरसा की खुदिया नदी, मैथन डैम, पंचेत डैम और बराकर नदी के घाटों पर हजारों लोगों ने स्नान कर भगवान विष्णु और चंद्र देवता की पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरा वातावरण ‘हर हर गंगे’ और ‘जय श्री विष्णु’ के जयघोष से गूंज उठा।

बराकर नदी पर भक्तिमय माहौल
बराकर नदी के घाटों पर भक्तों ने कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष स्नान और दीपदान किया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। महिला श्रद्धालुओं ने मां गंगा और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया, जबकि कई लोगों ने अपने पूर्वजों के नाम पर पवित्र जल में तर्पण भी किया। घाटों पर चारों ओर श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

मंदिरों में उमड़ी भीड़, दान का रहा विशेष महत्व
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने आसपास के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मां काली, भगवान शिव और भगवान भास्कर के मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगीं। कई श्रद्धालुओं ने गरीबों और असहाय लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान किया। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया दान भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है और इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धर्मग्रंथों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर राक्षसों का संहार किया था। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। चिरकुंडा की बबीता राय और किरण देवी ने बताया कि दीपदान और स्नान से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व हर साल बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए। मोहलबनी और लाल बंगला घाट पर पुलिस बल की तैनाती, चिकित्सा टीमों की मौजूदगी और स्वंयसेवी संस्थाओं की सहायता से श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा दी गई। घाटों पर मेला जैसा दृश्य था, जहां बच्चों के लिए झूले, खिलौने और प्रसाद के स्टॉल लगे हुए थे। वहीं, सिख समुदाय ने गुरु नानक जयंती को लेकर प्रकाश उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धा, उत्साह और भक्ति से झारखंड के घाटों पर आस्था की गंगा बहती रही।

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