Sahibganj: झारखंड के सहायक अध्यापक अब सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। राज्यभर के करीब 62 हजार सहायक शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन का ऐलान झारखंड राज्य सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा ने किया है, जिसमें “समान काम का समान वेतन” सहित कई प्रमुख मांगें शामिल हैं।
संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन को दो चरणों में बांटा है। पहले चरण में 5 नवंबर को गिरिडीह विधायक और राज्य के नगर विकास एवं उच्च शिक्षा मंत्री सुदीप्य कुमार सोनू के आवास का घेराव किया जाएगा। दूसरे चरण में 15 नवंबर को सभी जिलों के सहायक शिक्षक रांची के मोरहाबादी मैदान में एकत्रित होकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे। संगठन का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय चाहते हैं।
शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने कई बार शिक्षा मंत्री से मुलाकात की और अपनी समस्याओं को सामने रखा, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी के चलते उन्होंने राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है। संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि सरकार की चुप्पी उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है और अब शिक्षक अपने हक की लड़ाई खुद लड़ेंगे।
रविवार, 2 नवंबर को झारखंड राज्य सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा जिला कमेटी साहिबगंज की एक महत्वपूर्ण बैठक तालाब स्थित मध्य विद्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अशोक कुमार साह ने की, जबकि संचालन जिला सचिव चंदन कुमार सिंह ने किया। बैठक में राज्यस्तरीय आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई और सर्वसम्मति से आगामी कार्यक्रम तय किए गए।
बैठक में सहायक शिक्षकों की प्रमुख मांगों पर भी जोर दिया गया। इनमें समान कार्य के लिए समान वेतन, आकलन परीक्षा को TET के समकक्ष मान्यता, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष तय करने और सहायक शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार जैसी मांगें शामिल हैं। शिक्षकों ने कहा कि ये मांगे वर्षों से लंबित हैं, जबकि सरकार सिर्फ वादों तक सीमित है।
संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो राज्य के सभी स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। संगठन ने कहा कि सहायक शिक्षक राज्य की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब झारखंड सरकार पर दबाव है कि वह शिक्षकों की मांगों पर जल्द और ठोस कदम उठाए।



