Ranchi : झारखंड सरकार ने राज्य में कला, साहित्य और संस्कृति को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण संस्थाओं — झारखंड राज्य संगीत नाटक अकादमी, झारखंड राज्य ललित कला अकादमी और झारखंड राज्य साहित्य अकादमी — की स्थापना को मंजूरी दे दी है। पर्यटन, कला-संस्कृति एवं खेलकूद विभाग द्वारा इन अकादमियों के गठन से जुड़ी नियमावलियां कैबिनेट से स्वीकृत होने के बाद अधिसूचित कर दी गई हैं।
इन तीनों अकादमियों का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना, नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और युवाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे कला, संगीत, नाटक और साहित्य के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
अब इन अकादमियों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नियमावलियों के अनुसार, अध्यक्ष को प्रतिमाह ₹75,000, उपाध्यक्ष को ₹50,000 और कोषाध्यक्ष को ₹25,000 मानदेय दिया जाएगा। तीनों पदाधिकारियों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, हालांकि आवश्यक होने पर सरकार उन्हें पूर्व में भी पद से मुक्त कर सकती है। साथ ही, प्रत्येक अकादमी में एक सचिव (उप सचिव स्तर के अधिकारी) नियुक्त किया जाएगा, जो पूर्णकालिक कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम करेंगे।
प्रत्येक अकादमी में महापरिषद, कार्यकारिणी समिति और वित्तीय समिति का गठन होगा। महापरिषद में पर्यटन, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों सहित आठ विशेषज्ञ सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य के विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और कलाकार समुदाय से भी प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे ताकि अकादमियां जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य कर सकें।
तीनों अकादमियों के मुख्य कार्यों में संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना, संगोष्ठियों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों का आयोजन करना, और कला-साहित्य के क्षेत्र में राज्य सरकार को नीति संबंधी सुझाव देना शामिल होगा। साथ ही, प्रत्येक अकादमी अपने क्षेत्र से संबंधित एक गैलरी और पुस्तकालय की स्थापना भी करेगी, जिससे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
इन अकादमियों का वित्तीय संचालन राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधियों, साहित्य प्रकाशनों की बिक्री और ब्याज से प्राप्त राशि के माध्यम से किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह पहल न केवल कला-संस्कृति के क्षेत्र में झारखंड को नई पहचान देगी, बल्कि राज्य के युवाओं को भी अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन और संरक्षण का स्थायी मंच उपलब्ध कराएगी।



