Ranchi : रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए डॉ. हेडगेवार ने यह कदम उठाया। जेल जाने के बाद भी उनका संकल्प मजबूत हुआ। उनका मानना था कि हिंदू जब तक सशक्त नहीं होंगे, तब तक समस्याएं बनी रहेंगी।
प्रारंभिक दिनों में संघ के स्वयंसेवकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। महात्मा गांधी की हत्या के बाद स्वयंसेवकों को समाज में आलोचना झेलनी पड़ी। कई घरों को जला दिया गया और परिवार तक में सम्मान नहीं मिल रहा था। यहां तक कि संघ पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया।
बाद में परिस्थितियां बदलीं और संघ कार्य धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल गया। आज स्थिति यह है कि समाज संघ को पूरी तरह स्वीकार कर चुका है। लोग स्वेच्छा से संघ से जुड़ने को तैयार रहते हैं। इस मुकाम तक पहुंचने में संघ की चार पीढ़ियों की मेहनत लगी है।
बिट्टू ने लातेहार के चंदवा में आयोजित समारोह में कहा कि विभाजन के समय स्वयंसेवकों ने शरणार्थियों की मदद की थी। पाकिस्तान से आने वाले हजारों लोगों की जान बचाई गई। झारखंड में भी संघ के कार्यकर्ताओं ने राहत पहुंचाई। शताब्दी वर्ष में संघ कार्य को सर्वव्यापी बनाने की योजना बनाई गई है।
इसके तहत स्वयंसेवक घर-घर जाकर संगठन के बारे में जानकारी देंगे। सामाजिक सदभाव बैठकें आयोजित होंगी और सभी मंडलों व बस्तियों में हिंदू सम्मेलन होंगे। युवाओं के लिए गोष्ठियां होंगी और पथसंचलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल होंगे। एक वर्ष तक इस दिशा में विशेष अभियान चलेगा।
दो अक्टूबर को नागपुर में मुख्य कार्यक्रम होगा, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि होंगे। सरसंघचालक मोहन भागवत स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा। इसी दौरान महानगर कार्यवाह दीपक पांडेय ने स्वदेशी को अपनाने पर जोर दिया और कहा कि भाषा, भूषा, भजन, भोजन और भवन में स्वदेशी को बढ़ावा देना जरूरी है।



