Ranchi : रांची में आदिवासी 22 पड़हा सरना समिति की बैठक मंगलवार को सदमा मैदान में आयोजित की गई। बैठक में कुड़मी, कुर्मी और महतो को आदिवासी सूची में शामिल करने का विरोध किया गया। वक्ताओं ने साफ कहा कि आदिवासी समाज किसी भी कीमत पर इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेगा।
बैठक की अध्यक्षता बाबूलाल महली ने की और संचालन हरिलाल मुंडा ने किया। समिति ने कहा कि कुछ संगठनों की ओर से लगातार रैली और कार्यक्रमों की घोषणा की जा रही है। इससे आदिवासी समाज के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है। इस असमंजस को दूर करने के लिए संयुक्त रैली की जरूरत बताई गई।
बैठक में बताया गया कि कोई संगठन प्रभात तारा मैदान, धुर्वा में हुंकार महारैली करने की बात कह रहा है। वहीं कुछ संगठन मोरहाबादी मैदान में कार्यक्रम तय कर रहे हैं। अलग-अलग तिथि और स्थान की घोषणा से समाज में दुविधा और भ्रम फैल रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए एक संयुक्त मंच और तिथि तय करने का निर्णय लिया गया। हालांकि बैठक में सभी केंद्रीय आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे। इसलिए यह जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा को सौंपी गई कि वे विभिन्न संगठनों से चर्चा कर संयुक्त तिथि और कार्यक्रम तय करें।
बैठक में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष नारायण उरांव, डब्ल्यू मुंडा, अमर तिर्की, अभय भुटकुवर, प्रीतम लोहरा समेत कई ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकार की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि कुड़मी, कुर्मी या महतो को आदिवासी सूची में शामिल करना समाज की मूल पहचान के साथ खिलवाड़ है। सरना समिति ने यह भी ऐलान किया कि जल्द ही बड़े स्तर पर रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में समाज की एकजुटता और विरोध दोनों का स्पष्ट संदेश दिया जाएगा।



