Khunti: झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड अंतर्गत बिंदा पंचायत का चकोम्दा गांव आज भी सरकारी उदासीनता का शिकार है। लगभग दो सौ की आबादी वाले इस गांव के साथ बुंडू मामाइल और बालगी गांव भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से अबतक वंचित हैं। हालत यह है कि गांववाले वर्षों से श्रमदान कर खुद सड़क बनाते और मरम्मत करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस पहल अबतक नहीं हुई है। हालांकि दूसरी ओर से पक्की सड़क तो है लेकिन वहां से गांव की दूरी काफी है और सड़क भी जर्जर है और लंबी दूरी तय करना पड़ता है।

एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, मरीज और प्रसूताएं सबसे अधिक परेशान
गांववाले बताते हैं कि अगर किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है या कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। गांव खूंटी-चाईबासा मुख्य सड़क से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने के कारण यह तीन किलोमीटर का सफर किसी चुनौती से कम नहीं है।

बरसात के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भर जाता है, जिससे गांव में आना-जाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ग्रामीण मजबूरी में कीचड़ में घुसकर पैदल या अपने दोपहिया वाहनों को धक्का देकर गांव तक लाते हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भी असर
गांव के बच्चों के लिए बरसात के दिनों में स्कूल पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तीन किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते पर रोजाना चलना न सिर्फ थकाऊ बल्कि खतरनाक भी साबित होता है। 
ग्रामीणों की आत्मनिर्भरता – हर साल बनाते हैं सड़क
जहां सरकारी सिस्टम दम तोड़ चुका है, वहीं ग्रामीणों ने खुद अपने गांव के भविष्य को बनाने की ठानी है। ग्रामीणों के मुताबिक, वे हर साल सामूहिक श्रमदान से सड़क बनाते और मरम्मत करते हैं, क्योंकि बरसात के बाद सड़क टूट जाती है और बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं। कभी-कभी तो छह महीने में ही दोबारा सड़क बनानी पड़ जाती है।
सिर्फ आश्वासन, काम शून्य
ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने इस समस्या से विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अबतक सिर्फ आश्वासन ही मिला है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 
सिर्फ सड़क ही नहीं, अन्य सुविधाओं का भी अभाव
सड़क के अलावा स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य कई बुनियादी सुविधाएं भी इस गांव में सुचारू तरीके से नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार इस ओर ध्यान नहीं देती तो उनका संघर्ष और भी कठिन होता जाएगा।



