Ranchi: झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर सियासत तेज़ हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोपों का झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने करारा जवाब दिया है। जेएमएम के महासचिव बिनोद पाण्डेय ने शनिवार को प्रेस बयान जारी कर मरांडी को नसीहत देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी और नसीहत के बाद इस मुद्दे पर मरांडी के बयान पूरी तरह निरर्थक और औचित्यहीन हैं।
बिनोद पाण्डेय ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर अवमानना याचिका को महत्वहीन बताते हुए कहा था कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाना उचित नहीं है। अदालत ने साफ कहा था कि यह मुद्दा दो अधिकारियों के बीच प्रतिद्वंद्विता जैसा प्रतीत होता है। पाण्डेय ने याद दिलाया कि अदालत की इसी टिप्पणी के बाद मरांडी ने अपनी याचिका वापस ले ली थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ही मामले की गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिया और सरकार को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की छूट दे दी, तब बाबूलाल मरांडी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बार-बार सरकार और पुलिस पर आरोप लगाकर आखिर क्या साबित करना चाहते हैं?
“संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करती है सरकार”
जेएमएम महासचिव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार हमेशा संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। डीजीपी नियुक्ति का मामला वर्तमान में अदालत के विचाराधीन है और सरकार अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ रही है।
पाण्डेय ने विपक्ष को सलाह दी कि लोकतंत्र में आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन “भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है। विपक्ष का मतलब असंयमित बयानबाज़ी नहीं होता।”
“जनता सब देख रही है”
प्रेस बयान के अंत में पाण्डेय ने कहा कि जनता सब देख रही है और विपक्ष की राजनीति को समझ रही है। उन्होंने कहा कि यदि बाबूलाल मरांडी को सचमुच राज्य की कानून-व्यवस्था की चिंता है, तो उन्हें अदालत और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हुए संयमित भूमिका निभानी चाहिए, न कि बेवजह विवाद खड़ा करना चाहिए।



