Godda: गोड्डा में भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने सूर्या हांसदा के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उस विद्यालय का भी दौरा किया जो सूर्या हांसदा के द्वारा चलाया जा रहा था इस दौरान अर्जुन मुंडा ने बच्चों से भी मुलाकात की।
मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा का परिवार ललमटिया क्षेत्र के पारंपरिक मांझी परिवार से आते हैं। यह परिवार परंपरागत स्वशासन व्यवस्था का प्रधान है। अब उनकी माता जी इस दायित्व को निभा रही। उन्होंने कहा कि इस नाते इस परिवार के द्वारा सामाजिक सांस्कृतिक दायित्वों का निर्वहन किया जाता है। सूर्या हांसदा यहां के विस्थापितों की समस्याओं सहित कई सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाते रहे थे। जिसके कारण उनके ऊपर कई मुकदमे दर्ज हुए।
उन्होंने कहा कि 14 मुकदमों में उनको बरी किया गया था। लेकिन इनके खिलाफ साजिश करने वाले रुके नहीं। कई घटनाओं में इनका नाम जानबूझकर साजिश के तहत जोड़ा जाता रहा है। विगत 27 मई को सूर्या हांसदा पर जो मुकदमा दर्ज हुआ वह पूरी तरह झूठा था। वे उस दिन अपने बच्चे का जन्मदिन परिवार के साथ मना रहे थे। आगे उन्होंने कहा कि फर्जी केस दर्ज कर पुलिस उनको ढूंढने लगी और बिना कोर्ट वारंट के गिरफ्तार करते हुए साजिश के तहत उन्हें मार दिया गया।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि पुलिस का बयान और आम जनता के विचार में पूरी तरह विरोधाभास है। पुलिस जिसे अपराधी बता रही है लेकिन उनका चरित्र समाज सेवा का रहा है। वे एक विद्यालय का सफल संचालन करते थे जिसमें लगभग 350 बच्चे पढ़ते थे। शिक्षा के माध्यम से समाज की सेवा करने वाले को राज्य पुलिस साजिश के तहत अपराधी बता रही है। आखिर पढ़ाता वही है जो समाज का भविष्य गढ़ना चाहता है।
उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे और लोकतांत्रिक तरीके से उन्होंने चुनाव भी लड़े थे। सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामला एक साजिश के तहत हत्या है और यह राज्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर पोस्टमार्टम में भी गड़बड़ी की गई है। पूछने पर स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन लीपापोती करने में जुट गया है।
अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार से मांग किया कि जनता और सूर्या हांसदा के परिवार को राज्य सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है। इसलिए राज्य सरकार पहले दोबारा पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट तैयार करे और फिर हाइकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच समिति बनाकर घटना की निष्पक्ष जांच कराना सुनिश्चित करे। उन्होंने सूर्या हांसदा के परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की और कहा कि यदि राज्य सरकार खुद को आदिवासी समाज की हितैषी मानती है,पारंपरिक व्यवस्था की हिमायती मानती है तो फिर स्पष्टीकरण दे। 
आगे उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार इसपर पुनर्विचार नहीं करती है तो भाजपा आने वाले दिनों में न्याय दिलाने केलिए बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगी। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी,प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही,पूर्व मंत्री रणधीर सिंह,पूर्व सांसद सुनील सोरेन,पूर्व विधायक अमित मंडल और अनिता सोरेन उपस्थित रहे।



