Gumla : गुमला जिले के रायडीह प्रखंड की नवागढ़ पंचायत स्थित गेतुपानी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। प्रखंड मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर होने के बावजूद यह आदिवासी बहुल गांव विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटा हुआ है।
गांव में रहने वाले 31 परिवारों के लिए सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। यहां केवल एक कुआं ही पानी का सहारा है, जिसमें बरसात के दिनों में गंदा पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों को मजबूरी में वही दूषित पानी पीना पड़ता है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि नल-जल योजना और जल जीवन मिशन जैसी सरकारी योजनाएं गांव तक नहीं पहुंची हैं। उनका मानना है कि अगर गांव में जलमीनार स्थापित हो जाए तो लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सकता है और स्वास्थ्य समस्याओं में काफी कमी आएगी।
सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण लोग पगडंडियों के सहारे आवागमन करते हैं। बरसात के मौसम में रास्ता पूरी तरह टूट जाता है, जिससे आवाजाही लगभग बंद हो जाती है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बहंगी के सहारे लगभग दो किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है, क्योंकि एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार रास्तों को श्रमदान से ठीक किया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के साथ-साथ गांव में बिजली की समस्या भी गंभीर है।
हालांकि गांव में पांच किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया गया था, लेकिन वह पिछले कई वर्षों से खराब होता रहता है। मरम्मत के लिए ग्रामीण आपस में चंदा जुटाकर व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह समाधान स्थायी नहीं है। रात में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने गांव की स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया है। लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द गांव में सड़क, पेयजल, बिजली और आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
यह गांव आज भी इस बात की मिसाल है कि विकास की योजनाएं कागजों पर तो मजबूत दिखती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कई दूरस्थ इलाके अब भी इंतजार कर रहे हैं।



