Dhanbad : धनबाद के झरिया स्थित कोयरी बांध इलाके में मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यह इलाका पिछले 101 वर्षों से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच गहरी एकता और सौहार्द की मिसाल पेश करता आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत करीब एक सदी पहले हुई थी, जिसे आज भी नई पीढ़ी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है। समय और पीढ़ियों के बदलाव के बावजूद यहां का सामाजिक विश्वास और आपसी सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है।
मुहर्रम के अवसर पर पूरे इलाके में विशेष गतिविधियां देखने को मिलती हैं। ताजिया निर्माण, इमामबाड़े की सजावट और जुलूस की तैयारियों में सभी समुदायों के लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं। यहां यह नहीं देखा जाता कि कौन किस धर्म से है, बल्कि सभी लोग इस साझा परंपरा का हिस्सा बनकर आयोजन को सफल बनाते हैं।
कोयरी बांध की सबसे बड़ी पहचान महाबली भीमसेन दल अखाड़ा है, जो मुहर्रम के जुलूस में पारंपरिक प्रदर्शन करता है। दिलचस्प बात यह है कि इस अखाड़े में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल होते हैं और लगभग 90 प्रतिशत सदस्य दूसरे समुदायों से आते हैं। यह अखाड़ा 1925 से निरंतर इस परंपरा का हिस्सा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां का मुहर्रम जुलूस केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। जुलूस के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, अखाड़ों की प्रस्तुति और ‘या हुसैन’ की सदाएं पूरे क्षेत्र को श्रद्धा और अनुशासन के माहौल में बदल देती हैं।
जुलूस के दौरान स्थानीय लोग पानी, शरबत और अन्य व्यवस्थाएं करके प्रतिभागियों का स्वागत करते हैं। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं, जिससे यह परंपरा और भी मजबूत होती जा रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुहर्रम केवल इमाम हुसैन की शहादत की याद नहीं, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष, मानवता, त्याग और धैर्य का संदेश भी देता है। यही कारण है कि यह आयोजन सभी धर्मों के लोगों को समान रूप से जोड़ता है।
झरिया का कोयरी बांध यह संदेश देता है कि जब समाज में विश्वास और सम्मान होता है, तो धर्म और जाति की दीवारें कमजोर पड़ जाती हैं। यह परंपरा न केवल क्षेत्रीय पहचान है, बल्कि पूरे देश के लिए सामाजिक एकता का उदाहरण भी है।
आज के समय में जब समाज में एकता और सद्भाव की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही है, तब कोयरी बांध की यह 101 साल पुरानी विरासत एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आती है। यह दिखाती है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता और साझा संस्कृति में निहित है।


