Latehar : लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत साल्वे गांव में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। कभी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाला यह गांव आज हर घर नल से जल आपूर्ति के जरिए राहत की सांस ले रहा है।
करीब 1000 की आबादी वाला यह गांव पूरी तरह आदिवासी और दलित बहुल है। कुछ वर्ष पहले तक यहां पेयजल की भारी किल्लत थी। ग्रामीणों को पानी के लिए नदी, नाला और कुओं पर निर्भर रहना पड़ता था। खासकर गर्मियों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी, जब कई बार दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था।
बरसात के मौसम में हालात और कठिन हो जाते थे, जब नदी-नालों का पानी दूषित हो जाता था और ग्रामीणों को मजबूरी में वही पानी इस्तेमाल करना पड़ता था। इससे बीमारियों का खतरा भी बना रहता था।

जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद गांव की तस्वीर बदलने लगी। गांव में करीब आठ जल मीनार स्थापित किए गए और धीरे-धीरे हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचा दिया गया। अब अधिकांश घरों में नियमित रूप से साफ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले महिलाओं को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जिससे उनका काफी समय और मेहनत बर्बाद होती थी। लेकिन अब घर के आंगन में ही पानी उपलब्ध होने से जीवन आसान हो गया है।
गांव के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है और इससे उनकी दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है।
योजना की देखरेख स्थानीय स्तर पर भी की जा रही है। ग्रामीण खुद जल शुल्क के रूप में मामूली राशि जमा करते हैं, जिससे छोटी-मोटी खराबियों की मरम्मत आसानी से हो जाती है।

वहीं विभागीय स्तर पर भी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। कार्यपालक अभियंता दीपक महतो के निर्देश पर सहायक अभियंता प्रशांत पांडेय और कनीय अभियंता राहुल कुमार सिंह समय-समय पर गांव का निरीक्षण करते हैं। इसके अलावा जलसहिया और ग्रामीणों की बैठक भी हर 15 दिन में होती है, जिससे व्यवस्था पर नजर बनी रहती है।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में 24 से 48 घंटे के भीतर मरम्मत कर जल आपूर्ति बहाल कर दी जाती है।
साल्वे गांव आज इस बात का उदाहरण बन गया है कि यदि सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू किया जाए और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो, तो ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव संभव है।



