Dumka : दुमका जिले के बासुकीनाथ में बाल मजदूरी के खिलाफ श्रम विभाग ने विशेष अभियान चलाकर तीन बाल श्रमिकों को रेस्क्यू किया है। अभियान के दौरान होटल, नाश्ता दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की गई। श्रम विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को सख्त चेतावनी दी गई है।
श्रम विभाग की ओर से गठित धावादल ने बासुकीनाथ मेला क्षेत्र में विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। इस दौरान कई स्थानों की जांच की गई, जहां काम कर रहे बच्चों की पहचान की गई। अभियान का नेतृत्व दुमका के श्रम अधीक्षक सूरज कुमार हांसदा कर रहे थे।
श्रम अधीक्षक ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के हैं और उन्हें बाल मजदूरी से मुक्त कर आगे की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं बल्कि विद्यालय है और उन्हें शिक्षा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अभियान के दौरान श्रम विभाग ने होटल संचालकों, धर्मशाला प्रबंधकों और अन्य व्यवसायियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में बाल मजदूरी न कराई जाए। यदि किसी प्रतिष्ठान में बाल श्रमिक पाए जाते हैं तो संबंधित संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूरज कुमार हांसदा ने बताया कि बाल मजदूरी कानून के तहत बच्चों से काम कराना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और छह माह तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
श्रम अधीक्षक ने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी ढाबे, होटल या अन्य प्रतिष्ठान में दोबारा बाल श्रमिक पाए जाते हैं तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने व्यवसायियों से अपील की कि वे बच्चों को काम पर लगाने के बजाय उन्हें शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें।
श्रम विभाग ने साफ किया है कि बाल मजदूरी उन्मूलन को लेकर इस तरह के जांच और छापेमारी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। विभाग का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और समाज को बाल मजदूरी जैसी कुप्रथा से मुक्त करना है।


