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सीएम हेमंत सोरेन के गृह प्रखंड के रालीबेड़ा गांव में पेयजल संकट, चुआं का गंदा पानी पीने को मजबूर सैकड़ों ग्रामीण

Ramgarh : रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित रालीबेड़ा गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह प्रखंड से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित इस आदिवासी बहुल गांव के करीब 60 परिवारों के लगभग 350 लोग स्वच्छ पेयजल की सुविधा से वंचित हैं और मजबूरी में प्राकृतिक स्रोत यानी चुआं के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

पहाड़ की तलहटी में बसे इस गांव के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उसी स्थान से रिसने वाले पानी का उपयोग करते हैं। ग्रामीण प्राकृतिक जलस्रोत से निकलने वाले पानी को इकट्ठा कर पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह पानी सुरक्षित नहीं माना जाता और बरसात के मौसम में इसमें मिट्टी व अन्य अशुद्धियां मिल जाने से इसके दूषित होने का खतरा और बढ़ जाता है।

गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि चुआं से निकलने वाले पानी की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे समय ग्रामीणों को पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या कई बार सीमित मात्रा में उपलब्ध पानी से ही काम चलाना पड़ता है। इसके बावजूद उनके पास कोई वैकल्पिक जलस्रोत नहीं है, जिससे उनकी परेशानी लगातार बनी रहती है।

ग्रामीणों ने बताया कि कुछ वर्ष पहले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से मिनी जलापूर्ति योजना के तहत गांव में पानी की टंकी और संबंधित व्यवस्था स्थापित की गई थी। शुरुआती दौर में इस योजना से लोगों को राहत मिली और नियमित जलापूर्ति भी हुई। लेकिन तकनीकी खराबी आने के बाद पूरी व्यवस्था बंद हो गई और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण योजना निष्क्रिय होकर रह गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप लाखों रुपये की लागत से बनी जलापूर्ति योजना बेकार पड़ी है और ग्रामीण फिर से पुराने प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

हाल ही में गांव पहुंचे जेएलकेएम नेता संतोष चौधरी के समक्ष ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं और जल्द समाधान की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल की कमी का सीधा असर उनके स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद रामगढ़ के उपायुक्त (डीसी) ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने और समस्या के समाधान की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि बंद पड़ी मिनी जलापूर्ति योजना को फिर से चालू किया जाएगा और उन्हें सुरक्षित एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वर्षों से चली आ रही इस मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

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