Ranchi : झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले मतदाता सूची की मैपिंग का कार्य चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासकर राजधानी रांची में 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान मतदाताओं का मिलान अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। इसी समस्या को दूर करने और अधिक से अधिक मतदाताओं को सुविधा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने विभिन्न मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप आयोजित किए हैं, जहां लोग अपनी जानकारी का सत्यापन और मैपिंग करा रहे हैं।
चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रांची जिले में अब तक केवल 65.84 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो सकी है, जो राज्य के कई अन्य जिलों की तुलना में काफी कम है। विधानसभा क्षेत्रों के स्तर पर भी स्थिति अलग-अलग है। हटिया विधानसभा क्षेत्र में मैपिंग की प्रगति सबसे कम 50.84 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि मांडर विधानसभा क्षेत्र 82.98 प्रतिशत मैपिंग के साथ जिले में सबसे आगे है। धीमी प्रगति को देखते हुए प्रशासन ने 13 जून से दो दिवसीय विशेष अभियान चलाकर प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया।
विशेष कैंप के पहले ही दिन विभिन्न मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हालांकि, कई मतदाता 2003 की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर अपना रिकॉर्ड खोजने में कठिनाई महसूस करते दिखाई दिए। हरमू स्थित संत कुलदीप स्कूल पहुंची सविता देवी ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या पुराने मतदान केंद्र की जानकारी जुटाने में हो रही है। उनका कहना था कि वर्षों में मतदान केंद्र बदलते रहे हैं, इसलिए पुराने रिकॉर्ड के आधार पर मैपिंग कराना आम नागरिकों के लिए आसान नहीं है।
इसी तरह डीएवी कपिलदेव स्कूल पहुंचे मतदाता अरविंद कुमार भी अपनी पत्नी का नाम मैप कराने के दौरान परेशान नजर आए। उन्होंने बताया कि अलग-अलग चुनावों में मतदान केंद्र बदलने के कारण यह समझना मुश्किल हो रहा है कि 2003 में उनका केंद्र कौन-सा था। ऐसे कई मतदाता केंद्रों पर मौजूद अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से जानकारी लेने में समय बिता रहे हैं, जिससे प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी हो रही है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं की मैपिंग का कार्य 15 जून तक ही किया जाएगा। जिन मतदाताओं की मैपिंग समय पर हो जाएगी, उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सामान्यतः अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड अनमैप्ड रहेगा, उनका नाम तत्काल मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा, बल्कि उन्हें बाद में निर्वाचन पंजीकरण पदाधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस मिलने पर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनमैप्ड मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि अथवा माता-पिता या दादा-दादी से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दावे और आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को अधिक सटीक और प्रमाणिक बनाना है।
राज्य स्तर पर यदि प्रगति की बात करें तो पूर्वी सिंहभूम का बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र 93.48 प्रतिशत मैपिंग के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मधुपुर में 91.42 प्रतिशत और सारठ में 91.28 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है। पूरे झारखंड में औसतन 78.60 प्रतिशत मैपिंग का कार्य पूरा हुआ है, जबकि अभी भी लगभग 21 प्रतिशत मतदाताओं का रिकॉर्ड अपडेट होना बाकी है। 23 मई को अनमैप्ड मतदाता सूची जारी होने के बाद अब तक 14 लाख से अधिक मतदाताओं की सफल मैपिंग की जा चुकी है और चुनाव आयोग शेष प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है।


