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SIR और जनगणना 2027 को लेकर झामुमो मिशन मोड में, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की कवायद तेज

Ranchi : झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और आगामी जनगणना 2027 को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी राजनीतिक और सांगठनिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। पार्टी अब पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष Hemant Soren के निर्देश के बाद राज्यभर में लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

इसी अभियान के तहत झामुमो महासचिव और प्रवक्ता Vinod Pandey विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बैठकों का नेतृत्व कर रहे हैं। इन बैठकों में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंट (BLA) को SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची के सत्यापन और उसके राजनीतिक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। पार्टी का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय और जागरूक बनाना है।

इस रणनीति की नींव अप्रैल में रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित दो दिवसीय बैठक में रखी गई थी। 20 और 21 अप्रैल को हुई इस बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, SIR और जनगणना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने तथा राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने की रूपरेखा तैयार की गई थी। बैठक में संगठन की भूमिका को वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया था।

बैठक के बाद झामुमो ने जिला स्तर पर अभियान शुरू किया। 25 मई को लोहरदगा और 26 मई को गुमला में बड़ी संगठनात्मक बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें जिला, प्रखंड और बूथ स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। इन बैठकों में कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने और आम लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पार्टी ने अगले चरण के कार्यक्रमों की भी घोषणा कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार 2 जून को पश्चिमी सिंहभूम, 3 जून को पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां तथा 4 जून को सिमडेगा में संगठनात्मक बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के माध्यम से झामुमो राज्यभर में अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।

इस अभियान के दौरान झामुमो भाजपा पर भी लगातार निशाना साध रही है। पार्टी महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति गरीबों और वंचित वर्गों के अधिकारों को सीमित करने वाली रही है। उनका कहना है कि पहले योजनाओं और अधिकारों को रोका जाता है और बाद में उसी मुद्दे पर राजनीति की जाती है। उन्होंने झारखंड को इसका प्रमुख उदाहरण बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

झामुमो का दावा है कि SIR और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की आड़ में गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों को व्यवस्था से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची और सरकारी लाभार्थी डेटाबेस में गड़बड़ियों के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी आशंका को लेकर झामुमो अब गांव-गांव और बूथ-बूथ तक अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ अपने संगठन को भी और अधिक मजबूत बनाने में जुट गई है।

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