Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने एक सीट पर मजबूती से दावा ठोकते हुए चुनावी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी फिलहाल अपने प्रत्याशी के नाम से ज्यादा जीत के लिए जरूरी वोटों का गणित साधने में जुटी हुई है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता जल्द ही एनडीए सहयोगी दलों से मुलाकात करेंगे। इसमें जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और आजसू पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कर राज्यसभा चुनाव में संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। भाजपा की कोशिश है कि एनडीए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे और एक सीट पर जीत सुनिश्चित की जाए।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का जून के पहले सप्ताह में झारखंड दौरा संभावित है। इस दौरान वे पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होंगे और राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम रणनीति तय करेंगे। पार्टी संगठन स्तर पर भी लगातार बैठकों का दौर जारी है।
भाजपा नेता दीनदयाल वर्णवाल ने कहा कि पार्टी ने प्रत्याशी उतारने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि भले ही एनडीए के पास अभी संख्या बल कुछ कम हो, लेकिन केंद्र की भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को देखते हुए कुछ विधायक अंतरात्मा की आवाज पर भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं।
उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताने पर भी प्रतिक्रिया दी। भाजपा का कहना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर समन्वय की कमी है और इसी का राजनीतिक लाभ विपक्ष को मिल सकता है। भाजपा नेताओं का मानना है कि गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर असहमति चुनाव को रोचक बना सकती है।
गौरतलब है कि झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। इनमें एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट पर सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले शामिल हैं।
दूसरी ओर एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के 21 विधायक तथा आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक शामिल हैं। संख्या बल कम होने के बावजूद भाजपा चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सत्ता पक्ष में एकजुटता बनी रही तो दोनों सीटों पर उसकी स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन किसी भी प्रकार की अंदरूनी असहमति चुनावी समीकरण बदल सकती है।



