Dhanbad : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर अब भारत की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने खास तौर पर नेताओं और मंत्रियों से अपने सुरक्षा काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने का आग्रह किया है ताकि पेट्रोल और डीजल की बचत हो सके।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद भाजपा शासित कई राज्यों में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी बीच झारखंड के धनबाद से भाजपा सांसद Dhullu Mahato का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम नहीं कर सकते, क्योंकि ऐसा करने से उनकी सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाएगा।
दरअसल मंगलवार को धनबाद सर्किट हाउस में पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता Babulal Marandi मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाएंगे। इसी दौरान पत्रकारों ने बगल में बैठे सांसद ढुलू महतो से भी यही सवाल पूछा।
सवाल के जवाब में ढुलू महतो ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर काफिले में वाहनों और लोगों की संख्या घटा देंगे तो माफिया गिरा देगा।” उनका यह बयान तुरंत सुर्खियों में आ गया। सांसद का इशारा धनबाद के कथित कोयला और अपराध जगत से जुड़े माफिया नेटवर्क की ओर था, जिनसे उन्हें लगातार खतरा होने का दावा किया जाता रहा है।
ढुलू महतो पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि धनबाद में सक्रिय माफिया गिरोहों से उनकी जान को खतरा है। उनका कहना है कि विरोधी तत्व मौका मिलने पर उनकी हत्या करवा सकते हैं। इसी कारण उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से बड़ा काफिला उनके लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि धनबाद जैसे संवेदनशील इलाके में सामान्य सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सांसद ढुलू महतो को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की हुई है। उनकी सुरक्षा में सीआरपीएफ के जवान भी तैनात हैं। बावजूद इसके उन्होंने यह बयान देकर साफ कर दिया कि वह फिलहाल अपने सुरक्षा काफिले में किसी तरह की कटौती करने के पक्ष में नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान एक ओर धनबाद की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, वहीं दूसरी ओर यह प्रधानमंत्री की अपील के संदर्भ में भी बहस को जन्म देता है।
ढुलू महतो के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे उनकी सुरक्षा की वास्तविक चिंता बता रहे हैं, जबकि कुछ आलोचक इसे प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपील के विपरीत मान रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व इस बयान को किस तरह देखता है और क्या आने वाले दिनों में सांसद अपने काफिले को लेकर कोई नया निर्णय लेते हैं या नहीं।



