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कानून-व्यवस्था को लेकर बाबूलाल मरांडी का हमला, प्रिंस खान मामले में NIA-CBI जांच की मांग

Dhanbad: झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में प्रेस वार्ता करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था सिर्फ कमजोर नहीं हुई है, बल्कि इसे योजनाबद्ध तरीके से बिगाड़ा गया है। मरांडी ने दावा किया कि सरकार जिलों में विवादित और “डेंटेड” अधिकारियों की पोस्टिंग कर प्रशासनिक तंत्र को कमजोर कर रही है।

प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी Anti Corruption Bureau (एसीबी) के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे अधिकारी को एसीबी प्रमुख बनाया गया है, जिनके खिलाफ पहले से मामले दर्ज हैं और जिनकी संपत्ति तक अटैच हो चुकी है। मरांडी ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद ऐसे अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने राज्य के चर्चित शराब घोटाले का भी उल्लेख किया। मरांडी ने कहा कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन पुलिस समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। इसका परिणाम यह हुआ कि लगभग 17 से 18 आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल गई। उनके अनुसार यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे मामले की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य की स्थिति ऐसी हो गई है मानो शासन-प्रशासन अपराधियों और माफियाओं के हवाले कर दिया गया हो। उन्होंने कहा कि विधानसभा में भी इन मुद्दों को उठाया गया, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस तंत्र अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने का काम कर रहा है।

धनबाद के गैंगस्टर प्रिंस खान का जिक्र करते हुए मरांडी ने कहा कि इस मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि यदि एक गैंगस्टर खुलेआम वीडियो जारी कर पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगा रहा है और उन्हें चुनौती दे रहा है, तो यह पुलिस व्यवस्था की गिरती साख को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है।

मरांडी ने मांग की कि प्रिंस खान मामले सहित राज्य के अन्य संगठित अपराधों की जांच National Investigation Agency (NIA) और Central Bureau of Investigation (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। उन्होंने कहा कि ये एजेंसियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकतीं, इसलिए यदि सरकार वास्तव में अपराध पर अंकुश लगाना चाहती है तो उसे खुद केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने की सिफारिश करनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने अंत में कहा कि सरकार इस पूरे मामले पर मौन बनी हुई है, जिससे जनता के बीच अविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराध और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी।

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