Khunti: झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा, खूंटी जिला के तत्वावधान में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन का आयोजन डाक बंगला परिसर में किया गया। सम्मेलन में झारखंड आंदोलनकारियों की लंबित मांगों, सम्मान पेंशन, रोजगार एवं राज्य सरकार के संकल्पों पर अमल नहीं होने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि मांगों की अनदेखी जारी रहने पर 10 जून को मुख्यमंत्री आवास का घेराव एवं प्रदर्शन किया जाएगा। 
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि “दो जून की रोटी” और आंदोलनकारियों के सम्मान के सवाल पर अब आंदोलन तेज किया जाएगा। साथ ही अबुआ सरकार में भी झारखंड की माय-माटी, भाषा-संस्कृति, जल, जंगल और जमीन पर हो रहे हमलों के खिलाफ उलगुलान छेड़ने का ऐलान किया गया।
मुख्य अतिथि एवं झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि सरकार में झारखंड आंदोलनकारियों के हितैषियों से अधिक विरोधी मानसिकता वाले लोग हावी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को न्याय, सम्मान और समाज में स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार देने में सरकार गंभीर नहीं है।
खूंटी जिला अध्यक्ष विजय सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों ने सरकार पर हमेशा विश्वास किया, लेकिन अब सरकार के लोग ही विश्वासघात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण आंदोलनकारी एक बार फिर उलगुलान के लिए बाध्य हुए हैं। 
केंद्रीय सचिव सह सिमडेगा प्रभारी तैयब अंसारी ने कहा कि आंदोलनकारियों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सभी आंदोलनकारियों से गोलबंद होकर अपने बच्चों, भविष्य और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया तथा 10 जून के मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम के लिए तैयार रहने को कहा।
छोटानागपुर प्रमंडल अध्यक्ष रोजलीन तिर्की ने कहा कि आंदोलनकारी संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और अस्तित्व को मिटने नहीं दिया जाएगा। “हम पहले भी लड़े थे और आगे भी लड़ेंगे,” उन्होंने कहा।
सम्मेलन में झारखंड आंदोलनकारियों के राजकीय मान-सम्मान, उनके बच्चों के लिए शत-प्रतिशत रोजगार एवं नियोजन की गारंटी, जेल जाने की अनिवार्यता समाप्त करने तथा सभी आंदोलनकारियों को 50-50 हजार रुपये सम्मान पेंशन देने की मांग सरकार से की गई। 
सम्मेलन में केंद्रीय कोषाध्यक्ष सरोजिनी कच्छप, केंद्रीय सचिव सूरज प्रसाद जायसवाल, पुनीत उरांव, अंथन लकड़ा, प्रकाश खलखो, सुजात टोप्पो, इशाक टोप्पो, विजय उरांव, मसकल्यान समद, नीलू देवी, महेंद्र खलखो, लारेंस बखला, बुधराम मिंज, मंगलदेव मुंडा, पौलुस मुंडा, बरनाबस होरो, दिलीप होरो, सूरज गोप, अनवर अंसारी, हीरा प्रधान, सोमारी मुण्डाईन, मिकेल बखला, दयाल हेरेंज, गोपाल मुंडा सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित थे।



