Deoghar: देवघर में बच्चों के लिए बनाए जा रहे अपार कार्ड (APAAR ID) को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। जिले में बड़ी संख्या में छात्रों का अपार कार्ड नहीं बन पाने के कारण स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। खासकर निजी स्कूलों में बिना अपार आईडी के एडमिशन देने से इनकार किए जाने के बाद अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।
शिक्षा विभाग के अनुसार अपार कार्ड छात्रों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान है, जिसमें उनके पूरे अकादमिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाता है। इस कार्ड के जरिए विद्यार्थियों को एक यूनिक आईडी दी जाती है, जिससे उनके स्कूल, परीक्षा, प्रमाणपत्र और अन्य शैक्षणिक विवरण आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हो सकते हैं। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
लेकिन देवघर जिले में इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अपार कार्ड निर्माण के मामले में देवघर राज्य के 24 जिलों में 20वें स्थान पर पहुंच गया है। यानी जिला केवल चार जिलों से ही बेहतर स्थिति में है। यह स्थिति शिक्षा विभाग और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि बच्चों का आधार कार्ड नहीं बनने की वजह से अपार कार्ड तैयार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अपार आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। कई बच्चों के पास आधार नहीं होने के कारण उनकी डिजिटल पहचान प्रक्रिया अधूरी रह जा रही है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अब आधार कार्ड निर्माण अभियान तेज करने का फैसला लिया है। सभी अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों के सहयोग से जल्द से जल्द बच्चों का आधार कार्ड बनवाएं, ताकि अपार कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
वहीं सरकारी स्कूलों में फिलहाल बिना आधार कार्ड के भी नामांकन लिया जा रहा है, लेकिन निजी स्कूलों में कई जगह अपार आईडी को लेकर सख्ती देखी जा रही है। इससे अभिभावकों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कई परिवारों को बच्चों के एडमिशन के लिए बार-बार स्कूल और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही आधार कार्ड को सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों में शामिल कर चुकी हैं। ऐसे में देवघर जैसे जिले में बड़ी संख्या में बच्चों का अब तक आधार कार्ड नहीं बन पाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन पर है कि वह जागरूकता अभियान और तकनीकी सुविधाओं के जरिए इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाता है।


