Ranchi: झारखंड में थानों में लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की निविदा प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर CCTV इंस्टॉलेशन में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई है।
तीन पन्नों के इस पत्र में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा गया था, लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि पुरानी निविदा को रद्द कर नई निविदा निकाली गई है और इसे किसी खास कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला कथित शराब घोटाले की तर्ज पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
अपने पत्र में उन्होंने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल का भी उल्लेख करते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मरांडी ने यह भी कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा भेजे गए एक पत्र में निविदा प्रक्रिया को संदिग्ध बताया गया है। उनके अनुसार, इससे साफ संकेत मिलता है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि निविदा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और सांठगांठ में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि केवल निविदा रद्द कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है।
बाबूलाल मरांडी ने संविदा कर्मचारियों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने वालों को सेवा विस्तार नहीं देने की धमकी दी जा रही है। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला भी बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।



