Ranchi : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और चर्चित फैसला लिया है। उन्होंने अपने साथ तैनात सभी सुरक्षा गार्डों को वापस भेज दिया है और उनके आवागमन के लिए उपलब्ध कराई गई कारकेड की तीन बोलेरो गाड़ियों को भी पुलिस विभाग को लौटा दिया। इस कदम के बाद राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं है और उनका भरोसा “ऊपर वाले” पर है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वे पहले भी बूढ़ा पहाड़ जैसे संवेदनशील इलाकों में बिना सुरक्षा के जाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले का मुख्यमंत्री से कोई संबंध नहीं है और यह सिर्फ उनके, पुलिस विभाग और वित्त विभाग के बीच का विषय है।
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत तब हुई जब वित्त मंत्री ने 29 जून को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर सुरक्षा कर्मियों के आवागमन के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में 16 सुरक्षा कर्मियों के आने-जाने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि पत्र भेजे जाने के बाद भी डीजीपी कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने डीजीपी कार्यालय के पत्र का हवाला देते हुए मंत्री के आप्त सचिव को सुरक्षा में लगे एक वाहन को पुलिस मुख्यालय लौटाने संबंधी नोटिस जारी कर दिया। इससे नाराज होकर मंत्री ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही वापस करने का निर्णय ले लिया।
मंत्री के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सत्ता पक्ष के भीतर प्रशासनिक समन्वय और विभागों के बीच संवाद को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस मुख्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राधाकृष्ण किशोर पहले भी अपने स्पष्ट बयानों और नीतिगत मुद्दों पर मुखर रुख के कारण चर्चा में रहे हैं। सुरक्षा गार्ड और सरकारी वाहन लौटाने का उनका यह कदम राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले पर आगे क्या कदम उठाते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई नया समाधान सामने आ सकता है, लेकिन फिलहाल वित्त मंत्री अपने फैसले पर कायम दिखाई दे रहे हैं।


