Ranchi : झारखंड के सारंडा क्षेत्र में तैनात सुरक्षाबलों के रोटेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मानसून के दौरान जंगल में लंबे समय तक तैनाती से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि नक्सल विरोधी अभियान पूरी तरह जारी रहेगा और अंतिम नक्सली के सफाए तक घेराबंदी नहीं हटाई जाएगी।
आईजी (अभियान) सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह ने बताया कि सारंडा में सुरक्षाबलों ने लगातार प्रभावी अभियान चलाया है, जिसके कारण नक्सल गतिविधियों में भारी कमी आई है। इसी वजह से अब जवानों को बारी-बारी से रोटेशन के तहत मुख्यालय भेजा जा रहा है और नए जवानों की तैनाती की जा रही है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार मानसून के दौरान जंगलों में डेंगू, मलेरिया और विशेषकर ब्रेन मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जवानों को स्वास्थ्य जोखिम से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
सुरक्षाबलों ने बताया कि सारंडा क्षेत्र में बीते लगभग तीन महीनों से नक्सलियों की कोई बड़ी गतिविधि नहीं देखी गई है, लेकिन इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन जारी है। करीब 10 हजार जवान अब भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।

आईजी नरेंद्र सिंह ने कहा कि मानसून के बावजूद पुलिस बल पूरी तरह तैयार है और नक्सलियों के खिलाफ अभियान में किसी तरह की ढील नहीं दी गई है। जवानों को मच्छरों और जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए जरूरी दवाइयां और किट भी उपलब्ध कराई गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक सारंडा क्षेत्र में हाल ही में कई नक्सलियों के सरेंडर के बाद उनकी संख्या कम हो गई है, जबकि कुछ वांछित नक्सली अब भी जंगलों में छिपे हुए हैं। इनमें कई पर लाखों रुपये के इनाम घोषित हैं और पुलिस ने उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी हुई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी वांछित नक्सलियों की पहचान और उनके ठिकानों की जानकारी पहले से जुटाई जा चुकी है। साथ ही उनके नेटवर्क और मददगारों पर भी नजर रखी जा रही है।
प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में अभियान और तेज किया जाएगा, ताकि सारंडा क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जा सके।
फिलहाल, रोटेशन के जरिए जवानों को राहत देने के साथ-साथ जंगल में लगातार सुरक्षा घेरा बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।


