Ranchi : झारखंड में 30 जून से शुरू होने वाले विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि पहले से शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी स्कूलों में इस निर्णय से पठन-पाठन पर गंभीर असर पड़ेगा।
एसआईआर अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस कार्य के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जा रही है। शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन उन्हें लगातार चुनाव, जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे विद्यालयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि राज्य में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को चुनावी कार्यों में लगाने से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम खराब होने पर शिक्षकों से जवाब मांगा जाता है, जबकि उनका काफी समय गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यतीत हो जाता है।
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जिला सचिव संजय यादव ने भी सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनगणना का कार्य पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है और अब शिक्षकों को मतदाता पुनरीक्षण अभियान में लगाया जा रहा है। इससे नियमित कक्षाएं बाधित होंगी और विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान होगा।
दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। राज्य में करीब 24,520 मतदान केंद्र हैं। जानकारी के अनुसार लगभग 50 हजार बीएलओ में पहले से 7,500 शिक्षक कार्यरत हैं और अभियान को सफल बनाने के लिए 25 हजार से अधिक शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकती हैं।
अधिकारियों का दावा है कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, राज्य में छात्र-शिक्षक अनुपात भी चिंता का विषय बना हुआ है। झारखंड में औसतन 36 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का है।
30 जून से शुरू होने वाले इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद 1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी, 4 अगस्त से 1 सितंबर तक दावा और आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया चलेगी तथा सभी दावों के निपटारे के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षक संगठनों की आपत्तियों को ध्यान में रखकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करती है या अपने मौजूदा निर्णय पर कायम रहती है।



