Simdega : झारखंड के सिमडेगा जिले में VB-G Ram G योजना (मनरेगा) के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। कुरडेग प्रखंड की कुटमाकच्छार पंचायत में कथित तौर पर मजदूरों के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनाकर सरकारी राशि की अवैध निकासी की गई है। मामले के उजागर होने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
जानकारी के अनुसार, योजना के तहत मजदूर नितेश कुमार सिंह के नाम पर पहले सामान्य वर्ग में जॉब कार्ड संख्या JH04001013002/107 जारी किया गया था। इस जॉब कार्ड के माध्यम से 7 अप्रैल 2025 से 14 जुलाई 2025 तक कुल 90 दिनों का रोजगार दिखाया गया और इसके एवज में 25 हजार 380 रुपये की राशि निकाली गई।
आरोप है कि इसके बाद उसी वित्तीय वर्ष 2025-26 में पुराने जॉब कार्ड को हटाकर नितेश कुमार सिंह को अनुसूचित जनजाति वर्ग का दर्शाया गया और उनके नाम पर नया जॉब कार्ड संख्या JH04001013002/1583 जारी कर दिया गया। नए जॉब कार्ड के जरिए 14 अक्टूबर 2025 से 28 मार्च 2026 तक 96 दिनों का कार्य दिखाकर 27 हजार 72 रुपये की अतिरिक्त राशि की निकासी कर ली गई।
यही नहीं, फर्जीवाड़े का दायरा नितेश कुमार सिंह तक सीमित नहीं रहा। उनकी पत्नी मोनिका सिंह के नाम पर भी इसी तरह दो अलग-अलग श्रेणियों में जॉब कार्ड बनाए जाने का आरोप है। पहले सामान्य वर्ग के जॉब कार्ड संख्या JH04001013002/108 के माध्यम से 25 हजार 380 रुपये निकाले गए। बाद में उस जॉब कार्ड को डिलीट कर अनुसूचित जनजाति वर्ग का नया जॉब कार्ड संख्या JH04001013002/10349 जारी किया गया, जिसके जरिए 27 हजार 72 रुपये की राशि और निकाल ली गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल कुछ सरकारी कर्मियों, पंचायत स्तर के कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा जैसी योजनाएं ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने और पलायन रोकने के उद्देश्य से शुरू की थीं, लेकिन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण योजना की मूल भावना को नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कुरडेग प्रखंड में इस तरह के केवल एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों मामले मौजूद हैं, जहां फर्जी जॉब कार्ड बनाकर सरकारी राशि की निकासी की गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रखंड की व्यापक जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति का केवल एक बार ही जॉब कार्ड बनाया जाता है। यदि किसी व्यक्ति के नाम पर गलत जानकारी देकर दूसरा जॉब कार्ड बनाया गया है और उसके माध्यम से राशि निकाली गई है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो मनरेगा अधिनियम के तहत दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, मनरेगा अधिनियम 2005 की धारा-25 के तहत किसी मजदूर के वैध जॉब कार्ड को हटाकर नया फर्जी जॉब कार्ड तैयार करना तथा उसके माध्यम से सरकारी धन की निकासी करना गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई, निलंबन तथा कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच किस स्तर तक करता है और क्या इस कथित घोटाले में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो पाती है या नहीं। फिलहाल इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


