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झारखंड राज्यसभा चुनाव: बैद्यनाथ राम की राह आसान, प्रणव झा के सामने 28 वोट जुटाने की कठिन चुनौती

Ranchi :  झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस की रणनीति और उसके उम्मीदवार प्रणव झा को लेकर हो रही है। एक ओर सत्तारूढ़ गठबंधन के झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, वहीं कांग्रेस को अपने उम्मीदवार के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने के साथ-साथ संभावित क्रॉस वोटिंग से भी सतर्क रहना पड़ रहा है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवाणी की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

कांग्रेस के सामने इस चुनाव में दोहरी चुनौती खड़ी है। पहली चुनौती अपने प्रत्याशी प्रणव झा को जीत दिलाने की है, जबकि दूसरी चुनौती किसी बड़ी राजनीतिक शर्मिंदगी या अप्रत्याशित हार से बचने की है। प्रणव झा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी माने जाते हैं और उनकी उम्मीदवारी पार्टी नेतृत्व की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है। यही कारण है कि झामुमो द्वारा दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद कांग्रेस अंत तक अपने प्रत्याशी पर अडिग रही।

दूसरी तरफ झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है। विधानसभा में झामुमो के पास 34 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 मतों की आवश्यकता होती है। ऐसे में पार्टी अपने दम पर बैद्यनाथ राम की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर 28 से अधिक प्रथम वरीयता वोट दिलाने की कोशिश भी कर सकती है ताकि किसी तकनीकी कारण या वोट निरस्त होने की स्थिति में भी कोई जोखिम न रहे।

कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा की जीत गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर मानी जा रही है। कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायकों के अलावा झामुमो के अतिरिक्त 6 वोट मिलाकर कुल 28 मत पूरे हो सकते हैं। लेकिन यदि इनमें से एक-दो वोट भी इधर-उधर होते हैं या क्रॉस वोटिंग होती है, तो कांग्रेस की स्थिति कमजोर पड़ सकती है और चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है।

इसी बीच भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवाणी की बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि नथवाणी एनडीए के विधायकों के अलावा अन्य दलों के कुछ विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में हैं। यदि वह सत्तारूढ़ गठबंधन में सेंध लगाने में सफल होते हैं, तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। राजनीतिक हलकों में इस संभावना को लेकर लगातार चर्चा जारी है।

वर्तमान विधानसभा गणित पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक शामिल हैं। वहीं एनडीए के पास भाजपा के 21, जदयू, आजसू और लोजपा (रामविलास) के एक-एक विधायक मिलाकर कुल 24 सदस्य हैं। ऐसे में हर वोट का महत्व काफी बढ़ जाता है और अनुशासित मतदान चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, झारखंड राज्यसभा चुनाव में बैद्यनाथ राम की जीत का रास्ता अपेक्षाकृत आसान नजर आ रहा है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के लिए 28 मतों का आंकड़ा सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यदि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो सकती है, लेकिन किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक चूक चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मतदान तक सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और राजनीतिक समीकरण साधने में पूरी ताकत झोंकते दिखाई देंगे।

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