Ranchi : झारखंड में विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हो चुकी है। राज्य में कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 चयनित छात्रों ने अपना प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। इस कार्यक्रम के तहत शुरुआती चरण में उन्हें ग्राउंड एक्टिविटी और सैद्धांतिक अध्ययन कराया जाएगा, जिसके बाद वास्तविक उड़ान (फ्लाइंग ट्रेनिंग) का प्रशिक्षण शुरू होगा। इस पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं को विमानन उद्योग में रोजगार और करियर के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
जानकारी के अनुसार, कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम एक जून से शुरू हो चुका है। चयनित छात्रों को दुमका स्थित स्टेट हैंगर में रखा गया है, जहां उन्हें विमानन से जुड़े तकनीकी विषयों, सुरक्षा मानकों, विमान संचालन के सिद्धांतों और अन्य आवश्यक सैद्धांतिक ज्ञान की शिक्षा दी जा रही है। ग्राउंड ट्रेनिंग पूरी होने के बाद प्रशिक्षुओं को उड़ान संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे पेशेवर पायलट बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल छात्रों को छात्रावास शुल्क के अतिरिक्त पूरे कोर्स के दौरान कुल 34.31 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह राशि एकमुश्त नहीं बल्कि छह अलग-अलग चरणों में जमा की जाएगी, ताकि छात्रों पर एक साथ आर्थिक बोझ न पड़े। भुगतान की यह व्यवस्था प्रशिक्षण की विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार निर्धारित की गई है।
भुगतान संरचना के अनुसार, पंजीकरण के समय 3.50 लाख रुपये जमा करने होंगे। इसके बाद उड़ान प्रशिक्षण शुरू होने से पहले 3.90 लाख रुपये देने होंगे। 20 घंटे की उड़ान से पहले 7 लाख रुपये, 50 घंटे की उड़ान से पहले 7 लाख रुपये, 100 घंटे की उड़ान से पहले 7 लाख रुपये तथा 150 घंटे की उड़ान से पहले अंतिम 5.91 लाख रुपये जमा करने होंगे। इस प्रकार पूरे प्रशिक्षण की कुल लागत 34.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
राज्य सरकार की योजना के तहत केवल भुगतान आधारित प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने की भी व्यवस्था की गई है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा के आधार पर 15 अन्य मेधावी छात्रों का चयन किया जाएगा, जिन्हें सरकार की ओर से निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से सक्षम न होने वाले योग्य अभ्यर्थियों को भी विमानन क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है।
छात्रों के चयन और प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) ने भी कुछ सुझाव दिए हैं। पर्षद का कहना है कि परीक्षा आयोजित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की जिम्मेदारी भी उसी को सौंपी जानी चाहिए। इससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और किसी प्रकार के भ्रम या विवाद की संभावना कम रहेगी।
वर्तमान में पर्षद केवल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की भूमिका निभा रहा है, जबकि प्रमाणपत्र सत्यापन की अलग व्यवस्था है। पर्षद का मानना है कि यदि पूरी प्रक्रिया एक ही संस्था के माध्यम से संचालित हो तो चयन अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय होगा। कुल मिलाकर, झारखंड में शुरू हुआ यह कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



