Bokaro : झारखंड भाजपा में संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। धनबाद और हजारीबाग के बाद अब बोकारो में भी पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कार्यकर्ता खुलेआम पार्टी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रदेश नेतृत्व मूकदर्शक बना हुआ दिखाई दे रहा है।
पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान को लेकर संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu और विधायक दल के नेता Babulal Marandi की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व का नेताओं और कार्यकर्ताओं पर प्रभाव कमजोर पड़ता जा रहा है, जिसका असर संगठनात्मक अनुशासन पर साफ दिखाई दे रहा है।
बोकारो के चास में बुधवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक Biranchi Narayan का पुतला दहन कर नाराजगी जताई। यह विरोध चास उत्तरी मंडल अध्यक्ष पद को लेकर सामने आया। बताया जा रहा है कि मंडल अध्यक्ष के रूप में राजेश घोषाल की नियुक्ति किए जाने के बाद पार्टी के एक गुट में असंतोष फैल गया। इससे पहले इस पद पर अमर स्वर्णकार थे, लेकिन नई कमेटी में उन्हें जगह नहीं मिलने से उनके समर्थक नाराज हो गए।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन भाजपा संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही थी, उसी दिन शाम को कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सामने आ गया। इससे यह संदेश गया कि पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा है और उसे नियंत्रित करने में नेतृत्व सफल नहीं हो पा रहा है।
विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक बिरंची नारायण की गुटबाजी के कारण बोकारो जिले में भाजपा का जनाधार कमजोर हो रहा है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी हार के चलते कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जिला संगठन में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जा रही है, जिन्हें स्थानीय कार्यकर्ता और जनता ठीक से पहचानते तक नहीं हैं।
कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व से मांग की कि संगठन की मौजूदा स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो बोकारो जिले में भाजपा संगठन और कमजोर हो सकता है। यह विरोध केवल स्थानीय असंतोष नहीं बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी का संकेत माना जा रहा है।
पुतला दहन कार्यक्रम में कई स्थानीय कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें दिनेश पाल, प्रदीप स्वर्णकार, लखु पाल, कृष्ण कुमार, कार्तिक, अभिजीत मोदक, दीपक, शंकर पाल, दिलीप दत्ता, पीयूष दत्ता, जीतेन दत्ता, राजू मंडल, अजय गोराई, गौतम स्वर्णकार, गौतम दे, मंगल कुमार, बाबू स्वर्णकार और सोनू खान प्रमुख थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व ने जल्द स्थिति को नियंत्रित नहीं किया, तो इसका असर आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।



