Hazaribagh : झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SBMCH) इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में बिजली संकट और खराब पड़े पंखों ने मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में घंटों बिजली गुल रहने से मरीज पसीने से तरबतर हो रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई वार्डों में लगे सीलिंग फैन या तो बंद पड़े हैं या बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज गर्मी और उमस से बेहाल हैं, जबकि उनके परिजन हाथ वाले पंखों और घर से लाए गए टेबल फैन के सहारे किसी तरह राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मरीजों के परिजनों का आरोप है कि एक वार्ड में 14 से 15 बेड होने के बावजूद वहां सिर्फ दो या तीन पंखे लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश खराब हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी के कारण मरीजों की तबीयत और बिगड़ रही है, जिससे परिजनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े जेनरेटर और सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। अस्पताल परिसर में 263 KVA, 163 KVA और 63 KVA क्षमता के तीन बड़े जेनरेटर मौजूद हैं। इसके अलावा सोलर पावर सिस्टम भी लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद बिजली कटते ही अस्पताल अंधेरे और उमस में डूब जाता है। इससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने कहा कि इलाज के लिए लोग उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां की स्थिति देखकर निराशा हाथ लग रही है। उनका कहना है कि अगर मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पताल में ऐसी स्थिति है, तो ग्रामीण इलाकों के छोटे अस्पतालों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई लोगों ने यह भी कहा कि गर्मी में मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देने में लगे हैं।
इस मामले पर जब शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट (डीएस) डॉ. राजकिशोर से बात की गई तो उन्होंने बिजली कटौती और डीजल की कमी को समस्या की मुख्य वजह बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि अस्पताल के कई वार्डों में पंखे खराब हैं और उनकी मरम्मत की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अस्पताल में लगा सोलर सिस्टम फिलहाल खराब पड़ा है, जिसे ठीक कराने के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

गौरतलब है कि एक ओर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों के निरीक्षण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर SBMCH की यह तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अस्पताल की बिजली और पंखों की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि लोगों को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके।



