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झारखंड समावेशी आजीविका योजना का शुभारंभ, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह बोलीं- गरीबों के सशक्तिकरण में राज्य बना देश के लिए मॉडल

Ranchi : रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन सभागार में ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) और The/Nudge Institute के संयुक्त तत्वावधान में “झारखंड समावेशी आजीविका योजना (JH-SAY)” का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर राज्य में अत्यंत गरीब परिवारों के सशक्तिकरण के लिए चलाए गए अल्ट्रा पुअर ग्रेजुएशन अप्रोच (UPAJ) के अनुभव, उपलब्धियां और सामाजिक प्रभाव भी साझा किए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री Deepika Pandey Singh ने कहा कि यह दिन झारखंड के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य एक ओर सफल विकास मॉडल के अनुभव देश के सामने रख रहा है, वहीं दूसरी ओर गरीब और वंचित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नई समावेशी योजना की शुरुआत भी कर रहा है। मंत्री ने कहा कि झारखंड ने समावेशी विकास के क्षेत्र में ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे अब पूरे देश में उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि UPAJ परियोजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत ग्रेजुएशन अप्रोच का देश का पहला पायलट प्रोजेक्ट था। इसे विशेष रूप से अत्यंत गरीब और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) समुदायों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से झारखंड में लागू किया गया था। इस परियोजना के तहत पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा और पलामू जिले के चार प्रखंडों में 4,000 अति-गरीब परिवारों तक महिला सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से पहुंच बनाई गई।

उन्होंने कहा कि झारखंड में इस मॉडल की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। राज्य में मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए भारत सरकार ने इस मॉडल को अपनाते हुए वर्ष 2025 में DAY-NRLM के अंतर्गत पूरे देश में उप-योजना के रूप में लागू करने का निर्णय लिया। मंत्री ने इसे झारखंड की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मंत्री ने जानकारी दी कि योजना के प्रथम और द्वितीय चरण में झारखंड को कुल 41 हजार अत्यंत गरीब परिवारों को योजना से जोड़ने की जिम्मेदारी मिली है। अगले चरण में छह जिलों के 16 हजार परिवारों तथा उसके बाद 25 हजार परिवारों को इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Hemant Soren के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

कार्यक्रम के दौरान डोली पहाड़िया की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की गई। बताया गया कि योजना से जुड़ने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। जो परिवार कभी भोजन की चिंता में रहता था, आज वही परिवार स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुका है और उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं। इस उदाहरण को योजना की सफलता और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बताया गया।

इस अवसर पर विभिन्न जिलों के लिए योजना के अंतर्गत स्वीकृत राशि के चेक भी वितरित किए गए। पूर्वी सिंहभूम को 13 करोड़ 92 लाख रुपये, पलामू को 11 करोड़ 2 लाख रुपये, गोड्डा को 9 करोड़ 57 लाख रुपये, सिमडेगा को 2 करोड़ 90 लाख रुपये और सरायकेला-खरसावां को 6 करोड़ 90 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। कार्यक्रम में Arun Kumar Singh, John Paul, JSLPS के अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, सामुदायिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न जिलों से आए लाभुक परिवार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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