Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नवनियुक्त पदाधिकारियों के बीच जिलों का आवंटन कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की ओर से जारी अधिसूचना में विभिन्न नेताओं को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष एवं मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा अधिसूचित पदाधिकारियों को संगठनात्मक मजबूती के उद्देश्य से जिला प्रभार दिया गया है। इन पदाधिकारियों का मुख्य काम जिला कांग्रेस कमेटियों के साथ समन्वय बनाकर पार्टी को बूथ और गांव स्तर तक मजबूत करना होगा।
जारी सूची के अनुसार गिरिडीह जिले की जिम्मेदारी आभा सिन्हा को दी गई है, जबकि कोडरमा के लिए विजय यादव और हजारीबाग के लिए राजीव रंजन प्रसाद को प्रभारी बनाया गया है। चतरा जिले की जिम्मेदारी केदार पासवान को और रामगढ़ जिले का प्रभार शिव कुमार भगत को सौंपा गया है।
इसी तरह बोकारो ग्रामीण जिला के लिए संजय पांडेय, बोकारो शहरी जिला के लिए शमशेर आलम (धनबाद), धनबाद ग्रामीण के लिए राकेश किरण महतो तथा धनबाद शहरी के लिए शकील अख्तर अंसारी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं रांची महानगर का प्रभार धर्मराज राम और रांची ग्रामीण की जिम्मेदारी रियाज अंसारी को सौंपी गई है।
लोहरदगा जिले के लिए आलोक कुमार दूबे, खूंटी के लिए चैतु उरांव, गुमला के लिए शमशेर आलम (रांची) तथा सिमडेगा के लिए अजय नाथ शाहदेव को प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा पलामू जिले की जिम्मेदारी विनय सिन्हा दीपू, गढ़वा की सुरजीत नागवाल और लातेहार की निरंजन पासवान को दी गई है।
पूर्वी सिंहभूम के लिए शशि भूषण राय, पश्चिमी सिंहभूम के लिए धर्मेंद्र सोनकर और सरायकेला-खरसावां के लिए बेलस तिर्की को संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है। देवघर जिले का प्रभार रविंद्र झा और दुमका जिले की जिम्मेदारी अशोक वर्मा को दी गई है।
सबसे चर्चित नियुक्तियों में पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख को जामताड़ा जिले का प्रभारी बनाया गया है। वहीं साहेबगंज के लिए मुन्नम संजय और पाकुड़ जिले के लिए जमील अख्तर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारी संबंधित जिला अध्यक्षों के साथ मिलकर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का काम करेंगे। पार्टी का लक्ष्य आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और ग्रामीण क्षेत्रों तक संगठन की पहुंच बढ़ाना है।



