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रांची में निजी स्कूलों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 106% तक फीस बढ़ाने वाले 18 स्कूलों को शोकॉज नोटिस

Ranchi: रांची जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठन में अनियमितताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के 16 सीबीएसई और 2 आईसीएसई स्कूलों के खिलाफ शोकॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से निजी स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है, जबकि महंगी फीस से परेशान अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

यह निर्णय मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें जिले के कई निजी विद्यालयों के प्राचार्य और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि, वार्षिक शुल्क वसूली और पीटीए गठन की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले के कुल 149 सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में से 131 स्कूलों ने पीटीए का गठन कर लिया है, जबकि 18 स्कूलों ने अब तक इसकी जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराई।

उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन स्कूलों ने वार्षिक फीस स्ट्रक्चर और पीटीए का विवरण नहीं दिया है, उनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्कूलों को आदेश दिया गया कि एडमिशन फीस और एनुअल चार्ज के नाम पर वसूले गए अतिरिक्त शुल्क को मौजूदा सत्र की मासिक फीस में समायोजित करने का विस्तृत एक्शन प्लान 10 से 15 दिनों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपें।

बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कई निजी स्कूल नर्सरी से लेकर 12वीं तक की कक्षाओं में 37 प्रतिशत से लेकर 106 प्रतिशत तक वार्षिक शुल्क बढ़ा चुके हैं। प्रशासन ने इसे आरटीई नियमों का उल्लंघन माना है। उपायुक्त ने कहा कि फीस संरचना पूरी तरह पारदर्शी, तर्कसंगत और अभिभावक हित में होनी चाहिए, ताकि मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

उपायुक्त ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के नाम पर वसूले जा रहे भारी शुल्क पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल टीसी जारी करने के लिए 25 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जो चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला प्रशासन ने साफ किया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता और शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा स्कूल बस चालकों का सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए सभी स्कूलों को ड्राइवरों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया।

बैठक में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि जल्द ही बीपीएल बच्चों के नामांकन के लिए लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। साथ ही अगले 10 दिनों के भीतर स्कूलों के साथ ऑनलाइन अथवा प्रत्यक्ष समीक्षा बैठक कर एक्शन प्लान की प्रगति की जांच की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

इसी दौरान जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना अभियान को लेकर भी स्कूलों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सभी निजी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रतिनिधियों से कहा कि वे छात्रों और अभिभावकों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना के लिए जागरूक करें। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने बताया कि se.census.gov.in पोर्टल के जरिए लोग स्वयं अपने परिवार और आवास संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि स्कूलों की मदद से इस राष्ट्रीय अभियान में अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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