Palamu: झारखंड के पलामू रेंज में पुलिस व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। चहेते पुलिस अधिकारियों को मुकदमों का अनुसंधान सौंपने की शिकायतों पर अब कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। इस मामले में पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों के कई थाना प्रभारियों को चिन्हित किया जा रहा है।
पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल ने हाल ही में निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाईं। उन्होंने पलामू जिले के छतरपुर इंस्पेक्टर कार्यालय का दौरा किया, जहां जांच के दौरान कई खामियां सामने आईं, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।
जांच में यह पाया गया कि छतरपुर, नौडीहा बाजार और पिपरा थाना क्षेत्रों में स्टेशन डायरी नियमित रूप से अपडेट नहीं की जा रही थी। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए डीआईजी ने तीनों थाना प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छतरपुर थाना में दर्ज मुकदमों की तुलना में लंबित मामलों की संख्या कई गुना अधिक पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, 159 दर्ज मामलों में से केवल एक का ही अनुसंधान पूरा किया गया था, जबकि बाकी मामले लंबित पड़े हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सामान्यतः तीन से चार गुना तक लंबित मामले स्वीकार्य माने जाते हैं, लेकिन यहां स्थिति उससे कहीं अधिक गंभीर पाई गई। इससे यह संकेत मिलता है कि मामलों के निष्पादन में लापरवाही बरती जा रही थी।
यह क्षेत्र नक्सल विरोधी अभियानों और राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। खासकर नौडीहा बाजार और पिपरा थाना क्षेत्र इंटरस्टेट बॉर्डर से जुड़े होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जहां पुलिस की सक्रियता बेहद जरूरी है।
डीआईजी किशोर कौशल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी थाना प्रभारी द्वारा मनमाने ढंग से चहेते अधिकारियों को केस सौंपना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग मुकदमों के निष्पादन और पारदर्शिता को लेकर पूरी तरह गंभीर है, और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


