Khunti: कर्रा प्रखंड के छाता पंचायत अंतर्गत कुरसे ग्राम में गुरुवार को ग्राम सभा के नेतृत्व में पारम्परिक संस्कृति, पोषण एवं स्वास्थ्य मेला का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल ग्रामीण जीवन की परंपराओं को जीवंत करने का प्रयास था, बल्कि स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल साबित हुआ। 
इस मेले की खास बात रही पंचायत के सभी 10 गांवों की सक्रिय और उत्साही भागीदारी। ग्रामीणों की सहभागिता ने सामुदायिक एकजुटता और सहयोग की एक मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की। आयोजन स्थल पर दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा, जहां पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
मेले का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को पुनर्जीवित करना, संतुलित और स्थानीय पोषण के महत्व को समझाना तथा आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना था। इस दौरान विभिन्न स्टॉल लगाए गए, जिनमें स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इन खाद्य सामग्रियों के पोषण मूल्य और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी भी ग्रामीणों को विस्तार से दी गई, जिससे लोगों में स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता बढ़ी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खूंटी विधायक सूर्य सिंह मुंडा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) स्मिता नगेसिया उपस्थित रहीं। उन्होंने मेले का अवलोकन करते हुए ग्राम सभा और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी, कर्रा सोसायटी फॉर रूरल एक्शन के अध्यक्ष एस. एम. शाफिन अली, मुजफ्फर अली सहित कई गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। 
उल्लेखनीय है कि इस मेले की शुरुआत पिछले वर्ष कर्रा सोसायटी फॉर रूरल एक्शन द्वारा की गई थी। संस्था की पहल और ग्रामीणों के सहयोग से यह आयोजन अब एक वार्षिक सामुदायिक उत्सव का रूप ले चुका है। इस वर्ष मेले का आयोजन पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित और व्यापक रूप में किया गया, जो सामूहिक प्रयासों और निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम है।
मेले के दौरान पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। हल, तीर-धनुष, ढेकी, सिलबट्टा, मोढ़ा, जाटा, चटाई, झाड़ू और सूप जैसी ग्रामीण उपयोग की वस्तुओं को प्रदर्शित कर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में मुखिया सुखराम मुंडा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनके नेतृत्व में पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया।



