Khunti: खूंटी जिले के उलिहातु स्थित महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली पर उड़ीसा से आए पाहनों (पारंपरिक आदिवासी पुजारियों) का एक जत्था पहुंचा। इस जत्थे में उड़ीसा के संभलपुर और सुंदरगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 12 से 15 पाहन शामिल थे।
इस दौरान देवान पड़हा, बडलाल पड़हा समेत कई पड़हा राजाओं की उपस्थिति रही, जिससे यह यात्रा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण बन गई। जत्थे में शामिल देवान पड़हा के पड़हा राजा जबलून गुड़िया ने कहा कि अब तक उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के बारे में केवल पढ़ा और सुना था, लेकिन आज पहली बार उनकी जन्मभूमि पर पहुंचने का सौभाग्य मिला है।
उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान बिरसा मुंडा और इस क्षेत्र के लोगों के बारे में जानने की गहरी जिज्ञासा थी। साथ ही, उनके घर पहुंचकर पूजा-अर्चना करने और दर्शन करने की जो इच्छा थी, वह आज पूरी हो गई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि हमारे पूर्वजों की कुर्बानियों का ही परिणाम है कि आज हम सुख और शांति से जीवन जी पा रहे हैं।
वहीं पड़हा राजा सुरेश समद ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर आकर उन्हें अपार खुशी हुई है। उन्होंने न केवल उलिहातु में जन्मस्थली का दर्शन किया, बल्कि डोंबारी बुरु जैसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थल का भी भ्रमण किया।
उन्होंने डोंबारी बुरु की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थल अत्यंत मनोरम और प्रेरणादायक है। इसके अलावा, उन्होंने यहां के आदिवासी समाज की सादगी, व्यवहार और कुशलता की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यहां के आदिवासी भाई-बहन बहुत ही सरल, मिलनसार और अच्छे स्वभाव के हैं, जिसने उन्हें काफी प्रभावित किया।
यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि उड़ीसा और झारखंड के आदिवासी समाज के बीच सांस्कृतिक एकता और आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करने का संदेश देती है।



