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चास नगर निगम में लेखपाल नियुक्ति पर विवाद गहराया: मेयर भोलू पासवान ने बताया अवैध, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Bokaro : चास नगर निगम में लेखपाल की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें मेयर और निगम कर्मी आमने-सामने आ गए हैं। लेखपाल पद पर कार्यरत सोमेन कुमार मंडल की नियुक्ति को लेकर मेयर भोलू पासवान ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि संबंधित कर्मी ने इसे पूरी तरह नियमसम्मत बताते हुए खुद पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

सोमेन कुमार मंडल का कहना है कि उनकी नियुक्ति पूरी प्रक्रिया के तहत हुई थी। उनके मुताबिक, वर्ष 2016 में 48 अभ्यर्थियों के बीच इंटरव्यू के आधार पर उनका चयन किया गया था। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई 2016 के विज्ञापन के आधार पर 3 अक्टूबर 2016 को उन्हें नियुक्ति पत्र मिला था। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी कार्यशैली से संतुष्ट होकर मेयर ने ही 19 मई 2017 की बोर्ड बैठक में उनका वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया था।

वहीं दूसरी ओर मेयर भोलू पासवान ने इस नियुक्ति को पूरी तरह अवैध करार दिया है। उनका कहना है कि नियुक्ति बिना विधिवत विज्ञापन और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के की गई थी। मेयर के अनुसार, सोमेन को मूल रूप से डबल एंट्री कार्य के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में उन्हें लेखपाल बना दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है।

इस विवाद के चलते निगम में तनाव की स्थिति बन गई है। मेयर की ओर से कार्रवाई करते हुए निगम कार्यालय के कई रिकॉर्ड को सील कर दिया गया है और लगातार सोमेन को पद से हटाने की मांग की जा रही है। वहीं सोमेन मंडल का आरोप है कि मेयर अपने किसी करीबी व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अजय नाथ झा ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी को पद से हटाने का निर्णय नहीं लिया गया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने और अपने-अपने दायरे में रहकर काम करने की अपील की है।

लगातार विवाद और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर सोमेन मंडल ने अब झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने निगम प्रशासन को 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और तब तक सोमेन को उनके पद पर बनाए रखने का आदेश दिया है।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में अदालत के फैसले और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि नियुक्ति वैध थी या नहीं, लेकिन इस विवाद ने चास नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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