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संघर्ष से शिखर तक: छाता बेचने वाले की बेटी शिवांगी बनी झारखंड टॉपर, 498 अंक लाकर रचा इतिहास

Simdega: झारखंड के Simdega जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक साधारण परिवार की बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से असाधारण सफलता हासिल की है। कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव की छात्रा Shivangi Kumari ने Jharkhand Academic Council की मैट्रिक परीक्षा 2026 में 498 अंक (99.60%) प्राप्त कर स्टेट टॉपर बनकर इतिहास रच दिया है।

शिवांगी एक बेहद साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता रामकिशोर साहू स्थानीय बाजार में किराने की छोटी दुकान चलाते हैं और छाता बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां छोटकी देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद शिवांगी ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया और अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।

शिक्षा की शुरुआत उन्होंने बरसलोया स्थित शांतिनिकेतन पब्लिक स्कूल से की, जहां उन्होंने पांचवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने प्रस्तावित उच्च विद्यालय लचरागढ़ से छठी से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की। उनका परीक्षा केंद्र एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय बानो था, जहां से उन्होंने राज्य में पहला स्थान हासिल किया।

विषयवार प्रदर्शन की बात करें तो शिवांगी ने अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वहीं हिंदी और सामाजिक विज्ञान में उन्होंने 98-98 अंक हासिल किए। यह उपलब्धि उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

अपनी सफलता का श्रेय शिवांगी ने अपने माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय को दिया है। उन्होंने बताया कि स्कूल में आयोजित विशेष कक्षाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को मजबूत किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सफलता में सेल्फ स्टडी की सबसे बड़ी भूमिका रही। परीक्षा के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई और मोबाइल का इस्तेमाल केवल पढ़ाई के लिए किया।

भविष्य को लेकर शिवांगी के सपने भी उतने ही बड़े हैं जितनी उनकी उपलब्धि। वह आगे चलकर कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं और न्यायिक सेवा में जाकर जज बनना चाहती हैं, ताकि समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्याय दिला सकें।

शिवांगी ने अन्य छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित पढ़ाई, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ की गई तैयारी ही सफलता की कुंजी है।

शिवांगी की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा है। यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

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